पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१६१

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महापीट-मरापुरुषोय कुल मिला कर जितना हो उतनी बांदीको मन : महापुरी ( 1) रामपानी। मिला फर जलफे साथ दो रसीको गोली बनाये। मनु महापुरुष ( म० पु० । महाकाली पुपचति । ! पान रोगीफे बलायलके भनुसार स्थिर करना होगा। . ग्रेट नर, महारमा (योगी शापि मादि)। पदमदिलाने इसके सेवन से पित्तरोग, पूल, मालपिन, पाण्ट, दली. लिया है, कि म्यक्षेत्र, उपद मया में मलादि मक, मी, मम, यमन मोर शितरोग मष्ट होता है। पचपदके रहनेले पांच प्रकारफे मदापुर जन्म देने है। - (रमेन्द्र सारस० वारकरोगाभि०) (२० स०१६ ) मदापीठ (सं० लो०) सती भनके प्रसिद्ध कायन पोठ।। २ नारायण भगवान । पीठ देगी। . " गदा परिभानममीददार महापीलु (सलो०) पीलति प्रतिष्टमने यिपित्तादिक सीम नुन रोपपम् । • मिति पोल (म गम्वादयश | उप ११३८ ) इति कु, नतो मृत्याति प्रपनामाiriin महान् पोलुरिति कर्मधा, एक प्रकारका पीलु सा. पन्दे मातरम ! परम्पारविन्द ॥" (मासिस .पर्याय-गृहत्पौलु, महाफल, राजपीलु, महारक्ष, मधु. ३महामेदा। ४दुए, पाती। पीलु। इसके फलका गुण-मधुर, पृष्य, विपनाशर, महापुरपदन्ता ( सतो .) महापुपरस्प दमा व मुलानि .पिसारामन, रविकर मामनाशक और प्रदीपक। . पस्पा। गनमूली। मदापोलुपति (सं० पु. ) इन्द्र। . महापुरान्तिका ( स० सी०) मदापुगपदम्ता स्यारों महापुस (सपु०) महारमा । 'कन रिना राप मन एवं महासापरी। २ मंदा । मदपुर (सलो०) औषध पानेका एक पुट। गाय- मदापुरपबिधा (समी० ) मंसविशेष प्रकाराम मदापुटपाकका विषय इस प्रकार लिमा- 'महापुमाय-जय सम्प्रदाययिरोग। शरदय मामक दो हाथ लेया, चौड़ा और गहरा तथा चौकोन एक. किसी महापुरासे प्रयसिन होने कारण इसका माग गदा बनाये। उसमें एक दजार - यनगोइठे सजा कर मदापुरपोय सम्प्राय दुमा है। १३. मामाम रखे। पीछे महोफे एक परतनमें मोगध भर कर गछी । प्रदेश मन्तर्गत मलोपोगरी नामक प्रा निरोगणि. तरह उसका मद पंद कर दे और तब उसे गरमें रणे । भूयो-फुसुमयर नामक एक कॉपर शरदेवमा हुए गोइठेके ऊपर रन जोड़े। इसके बाद और भी जन्म हुमा।मुना जाता है कि उन पिताका पूर्वनियाम पांच सौ वनगा उसमें पाल पर माग वाल दे। सो युगप्रदेशमें था। पिताको देव में भरने पपनसे को महापुर कहते हैं। (मार ) दो संस्थत सानादिरी विशेष ध्युत्पत्ति लाग को । मदापुप्य (स.पु.) १ पपिल, पुण्यमय । २ एक योधिपोटे पतीको निाले। फागो, उस्कल. मग मा. सस्यमा माम। यन गादि स्थानों परिश्रमण करने एप मगद्रांप पहुंगे। मदापुण्या (सखो०) एक नदीका नाम। यहां उन्होंने घोचतन्य महाप्रभुपे यमपम दो . महापुन (सं० पु०) पौत, पोता।

मात को। दरिनामप्रदाण उनका गला m।

मदापुमान (स.पु.) पर्वतमेद। (मारव भीमा) , मनन्सर पर लोर कर भासाम मग शर्मा महापुर (सं. )। यद मगर जो दुर्ग मानिस : प्रसार करने लगे। माग मोम प्रदेश में मद • मली भांति रशित दो। तापिरोर। मनो मनुष्य उमफे गलाप धर्ममा मनगरमा गरमे। स्नान करनेसे मुकि होती है। ( माल १५) मलेय जातिभेद मही मानने थे, गोकता. मदापुराण (सं. फ्लो) मदए नन् पुगनि । नाम गोगदेने पर गम हो ETC विरोमागुन मास प्रलोल हादसंभयाने गिमन , मानो मी 'ग्निाम' पुराणपिरो। fir free गए में देगा। माग या मापारि मारोगी Tol. 31, 35