पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१७२

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१५८ महामागी-महाभारत... महाभागी (स० वि०) महाभागिन् देखो। . अनु त पर्ण, २६ अरण्ययात्रा पर्व'; ३० फिम्भीरपधे . महाभाग्य (सक्को०) महय तत् भाग्यञ्चेति । प्रबल | पर्व, ३१ अर्जुनाभिगमन पर्च, ३२ किरातार्जुनपुर, 'भाग्य, शुभादृष्ट। पर्ण, ३३ इन्द्रलोकंगमन पर्ण, ३४ 'धर्म धौर करुणा महाभार (सं० पु०) महान भारः। अतिशय भार, भारो रसयुक्त नलोपाख्यांन पर्ग, ३५ फुरराज युधिष्ठिरकी योमा तीर्शयाता पर्ण, ३६ यक्षयुद्ध , ३७ निवातकर्वच महाभारत ( सं० क्ली० ) महत् भारत', या महान्त भारं युद्ध-पर्व, ३८ अजगर पर्ष, ३६ मार्कण्डेय समस्या - तनोतीति महाभार तन ड। ध्यासप्रणीत इतिहासशास्त्र ।। पर्व, ४० द्रौपदी और सत्यभामा संयांद पर्व, ४ . इसकी नाम-निरुक्ति इस प्रकार है :- घोपयाता पर्व, ४२ द्रौपदी-हरण पर्य, (इस पर्वमें जय- "एकतश्चनुरो वेदा भारतञ्चेतदेकतः । द्रथ द्वारा द्रौपदीका हरण, पतियता सावित्रोके अनुभुत " पुरा किन्न मुरैः सर्वैः समस्य तुलया धृतम् ॥ चरित्रका वर्णन और रामोपाख्यान सम्मिलित है) ४३ चतुयः सरहस्येभ्यो वेदेभ्योऽभ्यधिकं यदा। कुण्डलाहरण पर्व, ४४ आरणेय पर्य, ४५ घिराट् पर्वमें तदा प्रभृति लोकेऽस्मिन् महाभारतमुच्यते ।' पाएडयोंका विराट नगरमें आना' और 'अज्ञातवासका • महत्त्वाद् भारतत्याच महाभारतमुच्यते ॥" .. . पर्व, ४६ कोचकवध पर्घ, ४७ गोहरणपर्व, ४८ अमिमन्यु । (मारत-आ० ५० १ अध्याय ) और उत्तराका वैवाहिक पर्व, ४६ सैन्योद्योग पर्य: ५० . प्राचीन समयमें देवताओंने सम्मिलित हो कर एक सत्ययान पर्व, ५१ चिन्तान्वित धृतराष्ट्र पर्व, ५२ गुह्यतम ओर चारों घेद और दूसरी ओर इस महाभारतको तराजूके अध्यात्मज्ञान विषयक सनत सुजात पर्य, ५३ यान-सन्धि' पलड़ो पर रखा था। वजनमें यह महाभारत ही अधिक पर्य, ५४ भगवयान पर्व (इस पर्वमें मालिका उपा. : हुआ उसी समयसे इसका नाम महाभारत पड़ा। यह ख्यान, गालव चरित, कृष्णाका प्रवेश और पिदुला पुनका महत्व और गुरुत्वमें वेदको अपेक्षा वढ़ा चढ़ा है। सुतरी शासन आदि वर्णित है ), ५५ कृष्ण और कर्णका संवाद इसो महत्त्व और गुरुत्यके कारण ही इसका नाम महा. पर्व, ५६ कुरुपाण्डवका निर्वाण पर्च, ५७ स्थातिरय मारत हुआ। संख्या पर्व, ५८ कोपवद्धन, उल्लुफ दूताभिगमन पर्व, ५६ पर्वाध्याय। भम्योपाख्यान पर्व, ६० अद्भुत भीष्माभिषेक पर्व, ६१ .. प्रचलित महाभारतको अनुक्रमणिकाफे अनुसार जम्यूद्वीप सन्निवेश पर्व, ६२ वोपविस्तारको कीर्शनात्मा महाभारत प्रधानतः अठारह पर्यों में समाप्त हुआ है। भूमि पर्य, ६३ भगवतगीता पर्व, ६४ भोप्मयध पर्य, ६५ .इन पर्यो १०० पर्याध्याय हैं। जैसे, . . . . . द्रोणाभिषेक पर्व, ६६ संसप्तकयध पर्व, ६७ अभिमन्युक्य

१ पहला अनुक्रमणिका पर्व, २ पर्य-संग्रहपर्व, ३) पर्च, ६८ प्रतिज्ञापत्र, ६६ जयद्रययध पळ, ७० घटोत्कच.

पोपपर्ष, पौलोमः पर्च, ५ आस्तीक पर्व, ६ मादिशा- वध पर्य, ७१ लोमहर्षण द्रोणवध पर्य, ७२ नारायणास्त्र प पिचिस सम्भव पर्व, रजतुग्रह दाहपर्व, त्याग पर्व, ७३ कर्ण पर्ष, ७४ शल्यवध पर्ण, ७५ तालाई . दिलिप वकवध पर्व,.११ चैत्ररथ पर्व १२ प्रवेश पर्ग, ७६ गदायुद्ध पळ, 09 सारस्वत तीर्णकोर्शन लोक स्वार १३:शलिययुद्धमें जयलाभ पर्ण, ७८ अत्यन्त योभत्स सौप्तिक पा, ७८ मुदायण . गपूर पाएका वापि , १४.विदुरागमन पर्व, | पेपोक पर्न, ८० जल प्रादानानिक पर्य, १ स्त्रीविलाप बलाम पर्व, २६ प्रवास पर्ण, १७ सुभद्रा- पर्व, ८२ फुरुगणका प्रादपर्य, ८३ प्राह्मणयेश. -रण यौहरण बारावसाह पर्व, | धारो चाक राक्षस-यध पर्य, ८४ धोमधर्मरामका - समाविमाययो, २९ मा पर, २२ सावध, अभिषेक पर्य, ८५ गृहपरिभाग पर्य, ८६ शान्ति पर्य, ८० . या सकियो : राजधर्मानुशासन पर्य, ८८ भापदधगं पर्य, ८t मोक्षधर्म . . . प्रहाप्रश्नान . .... 1 0v...' . .. ... . . M to. AT अभिन परि .. पाद. 115 i . . . .। पर्छ, इसमें शुम प्रश्नाभिगमन, ग्रहाप्रश्नानुशासन, दुर्वासा । दबास - S

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