पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१९०

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'महामारत-महामीत . योगदां सदा" इत्यादि उकि उसको पोरफ है। विशे. . है । जबसे काशीरानसमा महाभारत गितमा ." पवारली शताब्दीमें रचित मृष्यरुटिको हरिवंशका : तवसे पूर्वतन साथियों का नाम बहुत कुछ लोप हो गया। मामास और सफे मध्य दौरममायका निदर्शन नहीं, फाशीरामके बाद उनके लड़के नंदरामदार, पनि रहनेसे हरिवंशको भी बुझाविर्भायके पहलेका अन्य कह दास निनाई पण्डित, पिलोचन पावती, पल्लमोर, सकते हैं। लोकनाथ दत्त, मधुसूदन नापिन, शिपमानसेन, माराम महाभारतको टोका। दास मादिके नाम उल्लेखनीय है। ये लोग मारेको .. महामारतकी बहुत-सी टोकाप पाई जाती हैं जिनमें अमलदारोफे पहले विद्यमान थे। भरेशो ममता देवस्थामी, सम्पायन और विमलयोधको टोका बहुत के बाद जो मय मनुयाद प्रकाशित हुए उनमें नाता .. प्राचीन है। इसमें प्यासफूट अर्थ और दुरूहल्यान यासी कालोपसन सिंह द्वारा प्रकाशित वाला पण .. 'को अर्थ लिया है । इसके अतिरिक्त अर्जुनमिश्रको नुनाद ही सर्व प्रधान है। . मारत अयं दीपिका, आनन्दपूर्ण मुनि विद्यासागरको महामारतिफ (महि०) महाभारतामिझ, महारत: व्यापारलावली, चतुर्भुजमिमको रोका, ईययोधको तस्यको सम्पूर्णपसे जाननेवाले। .: . . शानदीपिका, नन्दकिशोरको दार्थ प्रकाशिका, नन्दना• महामाप्य (सी०) परावलि-एत पाणिनि बारम चार्य को भारतदीपिका, नारायणसर्वतको 'भारताय । सुलका पिशव माप्य । फिर मस, हरि, कपट गादिने प्रकाश, नीलकण्ठचातुर्धरको भारतभापदोप, परमा- इस भापको टोका भी लिपी है। पान देशो। मन्द भट्टाचार्यको मोझधर्म टीका, यानारायणको मारत. मदामामुर (म. पु०) १ विष्णु। }ि २ प्रति रोका, रत्नगर्भ की टीफा, लक्ष्मणभट्टको भारतदीपिका, शय दीप्तिपता, जिसमें चमक दम हो। श्रीनियासाचार्य रचित टीका, रामानुजको घ्याएमा महाभिक्ष ( पु.) १ मि छ। २ गायमुनि, प्रदीप, आनन्दतीर्यको महाभारततात्पर्य निर्णय-टोका, ! भगवान युद्ध जो संसारको सब कामनाको परित्याग कर 'महामारतटिलक और महाभारतनिर्यावन नामक | भिश हुए थे। . . . . . . भशात प्रत्यकार रचित दो रोकाएं पाई जाती हैं। महाभिन ('मपुः ) उथश, सम्मान महामारतका भनुयाद । महामिनतात . (सं. लि.) मनात सम्भूत ", "पहले ही लिया जा चुका है, कि यदुत दिन हुए पयाद्रीप: जिसका उधम सभा दुभा दो। - में भीम, द्रोण, कर्ण और शल्यका कपिभाषामें 'पारस या | महभिहा हानामि ( पु.) पुर। . . . मारतयुग' नामसे अनुयाद हुआ था। भारतवर्ष में भी महामिमान (स.पुअतिशय अभिमान, गहा मारो प्रायः सभी भाषाओं में महाभारतका अनुपाद या मर्मा घमए । नुवाद देखा जाता है। हालफनामा कुमारप्पासका महानिर (स०) पाकुयनोपरामपुलमेर। अनुपाद मिलता है। इस प्रन्यका १२यरों शताम्दोमें / ( भार) बालपंशीय पिणुपनके समय गनुयाद मा पा। महाभिषय ( स० पु०') माइपर गोमाता रियों शताब्दी मराठी भाषामें भी महामारतका मनु- गुनाना। याद हुमा । उत्कल मापामें पानसे प्राचीन अनु। महामिपंत ( पु.) पोन मिक-मिला । पाद देखे जाते हैं। योगन्द पर अनन्तगिय पर निर्वाचन मिरयानन्दपोर, विजयिन्द्र, उत्सालकवि सारण, प. महामिपनि {म. लि. ) मरा भागार . पर, 'गादामसेन, 'राजेवदास, गोपीनाथ दत्त, बहा सम्मान करनेपा। पजारामदत मादिने महाभारत लिरा कर पछी ध्याति महामात (म.लि.) महान् भनिगयो गो। नि. ____ पाई है। इनमें गितने कागोरामशरके पूर्व पत्तो! मयत, या पोक(पु.)२