पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१९३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


१७ प्रणेता।' महापहियन-पहोमाया कृष्ण त्रयोदशी के दिन शनिवार, शतभिषा नक्षत्र तथा । "गोनरमाभ्यहिप-वाराहोप्ट्रोरगोद्भवम् । शुभयोग होनेसे महायारणी होती है। इस दिन महामासाष्टकं देवि देवताप्रीतिकारणम् ॥" गंगास्नान करनेसे तीन करोड़ फुलका उद्धार होता है। (कौलार्चनदीपिका) तथा स्नानदानादि विशेष शुभ फलप्रद है। फाल्गुन | २ गो-मांस, गो-को गोश्त । पूर्णिमाके याद कर्षण त्रयोदशीके दिन वारणी और उसमें | महामांसविक्रय (सपु० ) नरमांस-विनिमय, नरमांस. पूर्योक योग लगनेसे महायारणी होती है। का येवना। "रामयोगसमायुक्ता शनी शतभिषा यदि। महामांसी ( स० स्त्री० ) यदन्तीवृक्ष, संजीयनो नामका ' महामहेति विख्याता त्रिकोटीकुलमुदरेत् ॥" पौधा। (तियितत्व) । महामाई (हिं० स्त्री० ) १ दुर्गा। २ काली। महामहिमन् (सं० वि० ) महान् महिमा यस्य । १ अति- महामात्य (संपु०) राजाका प्रधान या सबसे बड़ा शय महिमान्वित, बड़ा प्रतापवान् । (पु०) २ अतिशय | अमात्य, महामन्त्रो। महिमा । ३ आश्चर्य प्रभाव । महामात्र ( स० त्रि०) महतो माता मर्यादा-परिमाण यस्य। १ प्रधान, श्रेछ। २ समृद्ध, सम्पन्न । ३ धन- नहामाहनत (सं० वि० ) प्रभूत शक्तिसम्पन्न, वड़ा यल. वान्, अमीर । (पु०) ४ प्रधान अमात्य, महामात्य । ५ . घान् । राज्यका प्रधान कर्मचारी, प्रधान व्यकि । राज्यको महामहेश्वर कवि-एकायली नामक अलङ्कारशास्त्रके समस्त देखरेख जिसके हाथ हो अर्थात् जिसकी पड़ी महामहेश्वरायतन (सं ० ) देवलोकमंद। . क्षमता हो घही महामान कहलाता है। . "दूपिते हि महामाने रिपुष्योऽपि धीमता । महामहोपाध्याय ( स० पु०) १ श्रेष्ठ पण्डिन, गुरुओंका स्वपक्षे यस्य विश्वास इत्यम्भतम निष्क्रिमः॥" गुरु। २ पफ प्रकारको उपाधि जो आज कल भारतमें (कामन्दकी ६९) संस्कृत विद्वानोंको प्रिटिश सरकारकी ओरसे ६ हाथियों का निरीक्षक । महायत। ८ महादयः। मिलती है। , महामात्री (सं० खो०) महामाव-डोप । १ आचार्य पनी । महामांस (स'को महत् गहित मांस', मन मांस २महामातको रसी। शब्दस्य पूर्व प्रयुक्ततया महच्छब्दस्य गर्हितार्थत्य ।। महामानसिका (सं० सी०) महामानसी, जैनियोंको एक मनुष्य के शरीरका मांस । शङ्ख, तैल, मांस मादि शब्दोंके । विद्यादेवीका नाम । पहले महत् शब्दको प्रयोग निपिंद्ध है। इस कारण मांस महामानसी (सं० स्रो०) महत् मानस' भक्कान् प्रति सदयं शंदके पहले महत् शन्दको प्रयोग रहनेसे श्रेष्ठ अर्थ न चेतो यस्य । जैनियोंकी एक विद्यादेवीया नाम । समझा जा कर गर्हित अर्थ समझा जाता है। महामानिन् ( स० वि०) अतिशय अभिमानी, बड़ा भारी .. "श तेले तथा मसि वैये ज्योतिपिके दिने। घमंडी। .. • यात्रायो पधि निद्रायो 'महन्छन्दो न दीयते ॥" महामानो (संवि०) महामानिन् देखो। . . . . . . . . . . (भहिटोकां') महामाया (संपु०) १ विष्णु । २ शिव । २ अमुरभेद । गाय हायो घोडे भैस, वराह, ऊर, उरग इन सात ४ विद्याधरभेद । (स्त्री०) ५ गङ्गा । ६ शुद्धोदनकी पत्नी प्रकारफे ' जन्तु फे-मांसको भी महामास कहते हैं। और युद्धकी माताका नाम । ७ आर्या छन्दका तेरहयां महाएंमी तिथिमें भगवती दुर्गादेवीको महामांस द्वारा भेद। इसमें १५ गुरु और २० लघु वर्ण होते हैं । मय. पूजा करनेसे साधकके सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं। इन घटन-पटीयस्त्वेन यिसन प्रोतीतिसाधनं माया महनी . "अष्टम्या मधिरमसिहामासः मुगन्धिमिः।' : चासी मायावेति यदा महती माया विश्वनिमा . . . पूजयेदहुजातीय तिमि जनैः शिाम " (तिधिनत्य शक्तियस्याः ८ दुर्गा । (रानि०) इसको लक्षण-