पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२१०

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पहारानगञ्ज-महाराजप्रसारिणोतेल महाराजगञ्ज- अयोध्याप्रदेशके. उनाव जिलेके अन्तर्गत। दूसरा तरीका-सोनामफ्षी, लोहा, अदरक, रांगा, ... पफ नगर ।. . . चांदी, सोना, सोहागा, सोंठ, तांपा, पिपरामूल, दार- महाराजचूत (सं० पु०.) महता. मिष्टादिगुणेन राजते। चोनी, यमानी, सेन्यवलवण, अतिषला, मोघा, धनियां, माद्रियते इत्यच ततः कर्मधारयः । उत्तम आम्र, वढ़िया गंधक, पारा, कपूर और कर्कटङ्गी प्रत्येक ,पफ एक आम। पर्याय-महाराजाम्रक, स्थूलान, मन्मथानन्द, । माशा, हींग २ माशा, मरिच ४ माशा, जैलो, लय और . कङ्क, नील कपित्थक, फामायुध, कामफल, राजपुत्र, तेजपत्र, प्रत्येक १ तोला, छोटी इलायची १२ तोला ३ नृपात्मज, महाराजफल, काम, महाचूत । कच्चेका गुण माशा, विटलवण ४ तोला, इन सब यस्तुओंको बकरीके कटु अम्ल, पित्त और दाहवर्द्धक। पपकेका गुण दूधमें अच्छी तरह पीस कर ४ . रत्तीको गोली बनाये। स्याटु, मधुर, पुष्टि, वीर्य और वलप्रद ।। इसका सेवन करनेसे नाह, प्रहणी और पूर्वोक , महाराजगुम (स.पु०.) महाराजोऽतिश्रेष्ठो द्रुमः । आरम् . रोग अति शीघ्र नए होते हैं। . . . . . . . . वधवृक्षा . (रसेन्द्रसाररा० ग्रहपीरोगाभिः). महाराजनगर---अयोध्याप्रदेशके सीतापुर जिलान्तर्गत महाराजपुर-मध्यप्रदेशफे मण्डला जिलान्तर्गत एक एफ बड़ा प्राम । यह लाहारपुरसे खेरी जानेके रास्ते पर | प्रसिद्ध प्राम। यह अक्षा० २२. ३५ ३०. तथा देशाः सोतापुर नगरसे ८ कोस पूर्वमें अवस्थित है। मुसल- ८०.२४ पू० नर्मदा और पंजारा नदीके संगमस्थल पर, मानी अमलदारोमें यह नगर वसाया गया है।. उस | अवस्थित है। पहले यह स्थान ग्रहापुत्र नामसे प्रसिद्ध समय इसका नाम इस्लामपुर था। .पोछे राजा तेज- [ इस्लामपुर था। पाछ राजा तज- था।. १७३७ इ०म राजा महाराज शाहने इसे अपने सिंह नामक किसी गौड़ीय राजपूतने इसे जोत कर महा- नाम पर वसाया। प्रतिवर्ष यहां एक मेला लगता है। राजपुर नामसे घोपित किया । आज भी यह स्थान उन्हों. महाराजपुर-सन्थाल परगनेफे राजमहल विभागान्ताव ', लोगोंके गधिकार में है। एक बड़ा गांव । यह पक्षा० २५.११.४५: उ०. तथा : महाराजनगर-मध्यभारतके बुन्देलखण्डके अन्तर्गत,चर- देशा०,८७:४७ पू०के मध्य अवस्थित है। यहां. इट: खाड़ी सामरतराज्यका एक नगर । इण्डियन रेलवेका एक स्टेशन है.। . .... . महाराजनृपतिवल्लभरस (स० पु०) रसीपविशेष । प्रस्तुत महाराजपुर-मध्यप्रदेशके ग्यालियर राज्यान्तर्गत . पर प्रणालो-कांतीसार लोदा ६ तोला, अपरक, ताया, मुक्ता बड़ा गाव। यह अक्षा०.२६ २८ उ० तथा.देशा०.७८ और सोनामक्खो प्रत्येक दो तोला, सोना, चांदी, सोहाग ७.पू०क मध्य अवस्थित है। जनसंख्या चार. सोफे फर्कटङ्गो, गपापल, दन्तमूल,. मिर्ग, तेजपत, फरीव है। १८४३ ६०को रक्ष्यों दिसम्यरको अंगरेज, यमानी. अतिबला. मोथा, सोंठ, धनिया, सैन्धवलवण, सनापति सर छ गाफने यहां पर मरहठोका.परास्त किया कपूर विडङ्ग चिता, विप, पारा, गधक प्रत्येक १ तोला, था। मरहठांने रणक्षेत्र में ५६ कमान मोर पारूद तथा निसोथका चूर्ण २ तोला, लवङ्ग, जायफल, जैतो, दारः गोला गोलो छोड़ कर ग्यालियरफे दुर्गमें पाश्रय लिया। घोनो प्रत्येक ४ तोला.फुल मिला कर जितना हो उसका. इस युद्धको विजयकीतिको घोषणा करनेके लिये उन माधा विट्लयण राया सबके समान इलायची. उसमें सब कमानोंको धातुसे कलकमें एक स्मृतिस्तम्भ बनाया मिलाये... पोछे यकरीफे दूध ७ बार और टावा नीयूफे | गया है। . . . . . रसमें सात. पार भावना दे कर. १० रत्तीको गोली महाराजप्रसारिणोतेल ( स० लो०) तेलीपयविशेष। पनाये। .गोलीको.छाया सुखा लेना होगा। इसका प्रस्तुत प्रणालो-तिलतेल ६८ सेर काढ़े के लिपेलाता- सेवन करनेसे मन्दाग्नि, संग्रहणी, भाम, कोष्ठबद्ध, कृमि, | तक ३००.पल, असगंध, रेडीका मल, विजयंद,शतमलो, पाण्ड, छर्दि, अम्लपित्त, हद्रोग, गुल्म, उदरी, भगन्दर, रास्ना, पुनर्णवा तथा दशमलका प्रत्येक वष्य और फर- अर्श, पित्तरोग आदि रोग जाते रहते हैं। . हदकी छाल, प्रत्येक दन्य १००.पल करके, देवशम .