पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३३८

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२१८ मोप-महमूद मदाय ( स० पु०) १ रयष्टाक एक पुवका नाम । ( कपा-, . पृश्निपणों, मामलता, महराज, गतायरी, गुह मां गरित्मा18)२ समुद्रको वाद, तूफान। और सहदेवी इन पाचों समहका नाम महादधि है। महौतम ( स० लि. ) मदोतो यस्य। १ अतिशय ५ श्रेष्ठ गोषधि, बन्दी दया। . . मोजोयुक्त, वा तेजस्वी । (पु०)२ फालके पुव एक महौषधी (सरसो०मदापधि हो । १ श्येत मटकारों, अमुरका नाम । ३राजमेद । ४ जातिविशेष। मफेद भटकटेया। ग्रामी। ३ कटुमा, कुटकी । महीजस्क ( स० वि०) महन् मोजो यस्य । भति तेजस्वी, अतिविया, अतिबला। ५ हिलमोचिका । पा प्रतापवान् । मानद (मुलतान-उल-आजिग, ममोन उहौस, निशामुदोम, महौद्यादि (स.पु.) माश्यलायन गृष्यसबके अनुसार अबदुल कासिम, महमूद गाजी )-सुप्रसिद' गुमला एक वैदिक भाचार्यका नाम । मान पादशाह । इनसे पहले किसी भी मुसलमान महौषध (सं० मो०) महत् औपधार भूम्यागुल्य, भुजित शासनकर्ताको यगदादक मलीफों द्वारा मुलवानगी घर ! २ शुण्ठी, सोंठ। ३ लशुन, लहसुन । ४ पाराहीकंद, पदधी नहीं मिली थी। इसके पिताका नाम अमर गेंठो। ५ घत्सनाम, यछनाग 1६ पिप्पली, पीपल [७. उल-गाजी नामिहोन-उला सुयुक्तगीन था । यह फारम- अतिविपा, अतीस । ८ महामेरा। पपिसी ऊ'चे मानदानका मका था। मा दने मन् . महीपधादि फाय--पररोग हितकर एक प्रकारका काढ़ा। ३६१ द्विजरीके १०यों मुहमको रातको जन्मप्रक्षण प्रस्तुत प्रणाली-सोंठ, गुलञ्च, मोथा, लालचन्दन, सस.! किया था महमूदफे जन्मसे एक घण्टा पहले उसका पसकी जड़ और धनियां कुल मिला कर २ तोला, इसे ! याप यह ज्यान माता धा, कि उमफे पर लांगनगे पर ३२ तोले जलमें पाक करे । जब ८ तोला जल रह जाय, वृक्ष पैदरा गौर यह इतना फासो बदने लगा, ir तब उसमें २ माशा चौनां और २ माशा मधु. साल फर देखते दसते आकाशको भेद फर युदताफारमें परिणत।। गोचे उतार ले। इसका सेवन करनेसे तीसरे दिन भाने गया। इसको छायाने सारी पृथ्योग ART याला ज्यर जाता रहता है। दिया। इसके बाद सुयुकगोग जाग उठा भौर महौषधि (सं० रो०) महती भोपधिः । १ पूर्या, दूध । २ स स्थान पर विगार करने लगा। इसी समय पर लजालुक्षप, लजालू । ३ सजीयनो। ४ मदानानीयवादाने माफर गयर दी, कि उमको खोने एक पुर द्रष्ययिशेष, कुछ यिशष्ट ओषधियोंका समह । भगयतो! प्रसय किया है। सुधुनगीन गारे दपं. पल II दुर्गायोफे महास्नानमें सावधि और मदाधि देनी इसने अपने लदा नाम मदमूर । महाका दोती है। मदास्नानमान दो महौषधि आयश्यक है। भर्य , प्रशंसाभाजन । उमो दिन रातको मिरगोरपं. ' "देवी सया ध्यामीयता नादिरशा तथा। पया या पुगरपुरका देय-मन्दिर गधामा माह रायपुप्पी तथा सिंदी मष्टमी च सुपर्वता॥ माप घरासापां टुमा । मदनको सस माय । महौपम्पएक मोज महास्नाने नियोगदैत् ।" ! जन्म, ममप मोगद में स्थान पर। इमरी गा. ___ . (गोविन्दानन्दस्व गारपपुराणपत) में जान लिया कि, गरियम पद मा मापन वहेला, व्यानी, बला, पतियला, शपुपी, सी, पुपर होगा। माद भान हरपुर । गिर भी अपमी (क्षोरफंकोलो) मार सुवर्चला इन ठोंके चूर्णको उसके चहरे पर मेयरका दाग पा. मांलये उR महौषधि कहत है। स्यामाविक मोदय कुछ मी मया। यह • दूसरे मतसे-- उन्होंने एक दिन दोनों ना मुददेश पर बनाया, "नापी श्यामNAT मराजा शतारी किमाधारण राजा नारा देगर rurat . पान सहयोप मौगिह'स्मा" मात है किन्तु र मेरे प्रति ऐननिय किए . " (गम्दया ) मेहग मुझे ही समय नही। ।