पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३५४

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. . . महमूद-महसूद खां खिलजी . महमदने उसने कहा था, कि तुम फारसके राजवंश । फर्ता । १५६५ ई में मिर्जा ईसा तरखानने अपने लड़के पर एक कायकी रचना करो। एक औरके लिये तुम्हें ! मिर्जा महम्मद वाफोके साथ भकर पर आक्रमण कर । एक असफी दी जायेगी। इस पर बड़े परिश्रमसे दिया। जब वे दुर्बला नगरके समीप पहुंचे, तब मह्म द. . फिरदौसाने ३० हजार शेर वनाये. किन्तु महमूदने अपना ने दलयल ले कर उनका सामना किया। महम्मद वाको वादा पूरा नहीं किया । इसके बदले में जब बहुत महम्मदको सैन्यसंख्या और पराक्रम देख कर भागनेको ; निन्दा हुई, तब उसने ६० हजार रुपया भेजवाया था। तय्यारी करने लगा। इसो समय उनको मालूम हुआ, . किन्तु दिलावर फिरदौसोने, जो लोग धन ले गये थे, कि फिरंगियोंने उनके खट्टदेश पर आक्रमण कर दिया है। उन्होंको यह धन बांट दिया था। व्याभापामें एक अब वे क्षण भर भी यहां न ठहरे, बड़ी तेजोसे स्वराज्यको . काध्य बना कर महमूदके पास भेज वहांसे चल दिया। लौट गये। उमझे दाद कविताका फोड़ा खा कर महमूदने ६० हजार महमूद खां खिलजी-मालवके एक शासनकर्ता। यह अमी ही उसके पास भेजी, किन्तु इन असफियोंके ! मह द शाह खिलजो (१म ) नाम धारण कर मालब.. पहुचनेसे पहले हो फिरदौसो कनमें पहुंच चुका था। सिंहासन पर अधिरूढ़ हुए। इनके पिता खानजहान् महमूद- -विकार नामक मुसलमान 'व्यवहारशास्त्रके खिलजी (मालिक मोगी और आजिम हुमाय"नामसे प्रणेता। ये बुरहान उल सरियात् नामसे भी मशहूर थे। मशहूर ) मालवराज सुलतान होसङ्ग शाहके बजोर थे। . . महम्मद देखो। सुलतान होसङ्ग के मरने पर उसका लड़का महम्मद शाई महमूद-कन्धारका एक अफगान मरदार। यह घिलो. (दूसरा नाम गजनो खi) मालवका राजा हुभा । महा दने । चंगीय मोर वाईसका पुव था। महम्मद देखा। अपने पिताके साथ पड़यन्त्र करके गजनी को विष महमूद सुलतान महम्मद सलजुकीका लडका । इसने | खिला कर मार डाला और आप १४३६ ई०में मालव- सुलतान शहरियारके महकारी रूपमें कई वर्ष तक सिंहासन पर बैठ गया। इस समय होसङ्गका दूसरा इराक और माजरविज्ञान प्रदेशका 'शासन किया था। लड़का मसूद अपने राज्यसे गुजरात भाग गया। गुज.. रातके राजा सुलतान अह्माद शाहने उसका पक्ष लिया उसके सरल व्यवहार पर प्रसन्न हो शहरियारने सितो, और दलवलके साथ मालवको चल दिया। वातुन और मा-मालिक नामक दो कन्याओंको उसके | गुजरातो सेना जव सारङ्गापुर पहुची, तब अहमदशाह साथ प्याद दिया। महमूद मसिर कुतुबशाहो नामक मुसल सोनामक मुसलमान-इतिहास- ने एक चतुर सेनापति के अधोन पानजहान के विरुद्ध | एक सैन्यदल भेजा । चोहर, भिलसा और चन्देरीसे के प्रणेना। इसके पिता का नाम कान्ह फिरोजो था। इमने नारोस-मामा-उल-हिन्द नामक एक इतिहासकी] परिचालित सैन्यदल यदि माण्डकी सेना के साथ मिल कर राहमें अलग अलग हो जाता रचना की। स राजा कुली कुतुबशाहके जमाने में इस 'कि उन लोगोंको जीत होती। किन्तु उनका यह कौशल ध्यर्थ निकला। शामको खानजहान माण्डु दुर्गमें पहुंचे।

उक्त - डाको मृत्युके समय अर्थात् १६१३ ई० में , ये !

गुजराधिपति भी उनके पीछे पीछे दुर्गके समोप तक आये थे। __खएडयुद्धमें असुविधा जान कर मा द खिलजी प्राह ना। महम्मद सुल्तारी देखो! . .. अपने दुर्गमें रह युद्धका आयोजन करने लगे। उन्होंने समझा उससे था, कि अतर्कितभावमें शत्रुओं पर चढ़ाई करना ही . युद्ध कसा वतलाता था। महम्म । मच्छा होगा। एक दिन दो पहर रातको उन्होंने . गुज- मर्तिके मन- राती सेना पर चढ़ाई कर दो। मल्लाद शाहको गुप्तवर ने प्राय २० वर्ष तक राजाके अधीन काम किया था। द हक-उल-यकोन नामक पारसियोंका धर्मशास्त्र- दुगम रह युद्धका आयोजन करने लो स न फराज-एक पाखंड मुसलमान ! यह अपने ने कहा इन मसाउद-जिनात्-उज-जमानके प्रणेता! | अच्छा होगा। एक देखा-सिन्धुप्रदेश के अन्तर्गत भाकरका एक शासन- । राती सेना पर चढ़ाई कर दो