पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३६४

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३१ महमूदाबाद-मांचो . , .. : . पहले महमूदखा नामक यहाँके एक तालुकदारने यह नगर | मांखो ( हिं० स्त्री० ) मक्खी देखो। . ..... - बसाया था। मांग ( हि० स्त्री) एक मांगनेकी क्रिया या भाय । २ . महमूदाबाद-गुजरात के अन्तर्गत एक नगर । विक्री या खपत मादिके कारण किसी पदार्थ के लिए महमूदो-गुजरातमें प्रचलित एक सिका। सुफोरमें यह | होनेवाली आवश्यकता या चाह । ३ सिरफे वालोंके बीच सिका ढाला जाता था। इसका मान १२ पेन्स वा २६ / को एफ रेखा । यह धालोको दो ओर विभक्त करके बनाई पैसेके बराबर था। . . . जाती है। इसे सीमन्त भी कहते हैं। हिन्दू सौभाग्यवती महमूद समकन्दी (मौलाना)-समरकन्दवासी एक मुसल स्त्रियां मांगमें सिन्दुर लगाती हैं और इसे सौभागका मान-साधु । काव्यशास्त्र में इनकी अच्छी व्युत्पत्ति थी। चिह्न समझती है । ४ नायका गायदुमा सिरा ५ सिलका दाक्षिणात्यसे स्वदेश जाते समय शडोधारके हिन्दू राजा वह ऊपरी भाग जो फूटा हुआ नही होता और जिस भीमने इनके पोतादि लूट लिये थे। सुलतान महमूद पर पोसो हुई चीज रखी जाती है। किसी पदार्थका . विगाड़ाने इस गात्याचारका बदला लेनेके लिये भोमको ऊपरी भाग, सिरा। ७ मांगी देखो। .. परास्त किया और पीछे मार डाला। .. मांग-रीका (हि पु०) स्त्रियोंका गहना। यह मांग पर , ' मध (संपु०) विवस्वतके एक पुलका नाम । नील- पहना जाता है और इसके योचमें एक प्रकारका टिकमा कएठने इनका दूसरा नाम 'सहा' रखा है। होता है जो. माथे पर लटका होनेके कारण टीकेके मह युत्तर (संपु०) महाभारतके अनुसार एक जाति- समान जान पड़ता है। ........ का नाम। महून (सं० पु० ) एक राजाका माम । इन्होंने महनस्वामी | मांगन (हि. पु.) १ मांगनेकी क्रिया या भाव। २ याचक, भिखमंगा ., :. . . . मामक देवमूर्ति और मन्दिरको प्रतिष्ठा की। मांगना (हिं० कि० ) १ याचना करना, कुछ पाने के लिए (गजतरङ्गिणी ४।४) महनपुर (सली०) महनराज द्वारा प्रतिष्ठित एक प्रार्थना करना या कहना । . २ किसीसे कोई आकांक्षा । मगरका नाम। पूरी करनेके लिए कहना। माँ (हिं स्त्री०) जन्म देनेवाली, माता। | मांगफूल (हिं पु०) भाग-टीका देखो.1. , ....: मौकडी (हिं स्त्री०) १ मकड़ी देखो। २ कमखाव वुनमे- माँगल गीत ( हि पु०) विवाह आदिमें मंगल अवसरों पालोंका एक औजार । इसमें डेढ़ वालिश्नकी पांच तोलियां पर गाए जानेवाला गीत।। .. होती हैं और नीचे तिरछे बलमें इतनी ही बडी एक और | मांगी (.हि स्त्री०) धुनियोंकी धुनको में-फी पह लकड़ी . तोलो होती है। यह ठाठ सवा गज लम्बी एफ लंकदी जो उसको उस डांडीके ऊपर लगी रहती . है जिस पर पर चढ़ा हुआ होता है और करघेके लग्घे पर रखी जाती | सोनोपानी तात चढ़ाते हैं। है। ३ जहाजमें रस्से वांधनेके खूटे आदिका यह बनाया | मांच (हि० पु०) १ पालमें हया लगनेके लिपे चलते हुमा ऊपरी भाग जिसमें लकड़ी या दोनों या चारों ओर हुए. जहाजका रुख कुंछ . तिरछा, करना । २ पालके इस अभिमायसे निकला हुआ रहता है, जिसमें उस | नीचेवाले कोने में बंधा हुआ यह रस्सा जिसकी सहा. खूटमें षांधा हुभा रस्सा ऊपर न निकल आये। ४ पत- यतासे,पालको आगे बढ़ा कर या .पीछे हटा कर हयाके. पारके ऊपरी सिरे पर बनी हुई और दोनों ओर निकलो रुख पर करते हैं।. ... ' 'हुई लकड़ी। इसके दोनों सिरों पर ये रस्सियां घंधी होतो मचिना ( क्रि०) १ आरम होना, जारी होना।२ हैं जिनकी सहायतासे पतवार घुमाते हैं। . . प्रसिद्ध होना। ', . . . . माखन (हिं० पु०) मक्खन, नवनीत ।' :, ... : |मांचा (हिं पु०) १ पलंग, घाट । २ मचान । ३ खारको माखना ( क्रि० ) क्रुद्ध होना, क्रोध करना , | तरहको चुनी हुई छोटी पीढ़ी जिस पर लोग बैठते हैं ।

. , . माखना देखो। मांची (हिस्त्री०) पैलगाड़ियों मादिमें बैठने की जगहके