पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३७८

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. . . मामा मयुगदन दन .. योत मधुसूदन हदपमें अकुरित हुमागा, यह रिचाई फुड भी नहीं था। मधुसूदन दूसरा धर्मगत यो प्रण सनको शिक्षा और भादर्श पलयित होने पर भा गया किया उसका ठीक ठोक पता नहीं चलता। हिन्द कालेजको यति निम्नश्रेणास दो उन्लेन मारेलीमें प कालेजों पढ़ते समय ये प्यूम, रानमन, पिपोदर और गयको रचना मारन कर दी गो। यद्यपि उनको पार्कट यादि अन्ध भादरपूर्वक पढते थे। उस समय पूर्ण ययसको रचना माय उनके मान्य जीवन की रचना ! सहपाठियोंके जैसे ये भो सभी मतको उपेक्षा करने थे। का को सम्बन्ध नहीं गा, तोगी उनका साहित्यगन भलाया इसके विरोलियो, रिचासन, डेनिसपर धादि ___जीयन भाया और विकास हो गया था, इसमें सन्देह, की छानन्दको ऊपर तीक्षा दृष्टि रहती थी। इन्ही मय नहीं। फरणोंमे मालूम होता है, मधुसूदनने मागे चल कर ___ अठारह वर्षको उमरमें जब ये हिन्दुकालेजको द्वितीय माधनको प्रारण किया था। श्रेणी में पढ़ते थे उस समय सुन्दर अगरेजी कविता साधर्म प्रहण करने का एक दूसरा कारण यह गो लिगकर इन्होंने अच्छा नाम कमाया था। ये तथा था, कि ये एफ ईसाई कन्याके रूपगुण पर गोदित हो सिरोजियों दोनों ही यावरण शिष्य थे। अतएय दोनों गये थे। उन्होंने समझा, कि यदि साधर्म प्रहण कर को कविता एक मादर्शकी होती थी। इसी अठारहवर्षको तो इस फन्यास विवाद करने तथा लोड जामम अवस्थामें इन्दनि .iterary Gleaner नामक पत्रिका सुविधा दो सकती है। इसी दहेजसे एक दिन गपुग्दन में 'King Purney leucusd totohi' नामकी फयिता। रेभेरेएड कृष्णमोहन पन्दोपाध्यायफे निकर गधार मपनी १८४३९०में प्रकाशित की थी। इच्छा प्रकार फो। इस पर रमेरेएड बड़े प्रसप भीर मिफालेशमे उनको बदला भाको निता शेष मधुएदनको बजारफे सहकारी शासनफर्ता मि० पार्टफ गई। उन्होंने अपने म्यागायिक प्रतिभागलसे निज ! निकर ले गये। मि० पार्दने इस शिक्षित युयकको दोशा भाषा:प्रकाशको प्रणालीका आविष्कार कर लिया। देनेके लिये मा-याजफमएलोके दाय सौंपा। कयों पौर प्रोरे याला भाषामें उनका अधिकार हो गया।म मधुसूदनफे भात्मीय उन्हें याममैफे साथसे पलपूर्वक साप कपिना रनामें इन्हें पानसे मोने और नांदीके छोन न ले जायस भयसे उन्हान मदनको.फोट. पदक भी पुरस्कार में मिले थे। विलियम फिलेमें वदरमा लास घेटा करने पर भी लेगर जानकी उनकी प्रबल इन्छा यां। ये कहते । राजनारायणको अपना पुग्न नहीं मिला। दो पार दिन ध, फि लैपट गये बिना किसीकी मी फयित्यशक्तिः। फिलेमें थन्दोफे रूपमे रहने के बाद १८४३ १०को यों पूरी नहीं कहला साती। एड जानेसे पहले ही। फरपरीको मधुसूदन किन पिन्द्र निकट मोला रहने मेघनाद, योराणा, मसालाना आदि उत्थर मिसन चर्च-ध-मन्दिरमें दोशित हुए थे। उसी दिनसे कायोंकी रसना कर यहमादित्यमें सर्यो सिंहासन उनके नामफे पहले 'मान' गाद जोड़ा गया। 'मधिकार किया गा। साधा प्रण करके पार मधुपदन दिग्द काले समे पढ़ो ममय मधुसुदन उनल, अपना पर छोड्नेको पाध्य हुए। जब कमी ये ममप निप, अमितप्पी, पिलामी और धर्मनोति । पर आते सर उनको नरमपी माता उन्हें सम्बन्धी पिलयल उदासीन थे। घर अपयनशीलता, यह गिलाती पिलो थी। किन्तु ममामध्युतिरे काम्यानुराग, प्रेमपिपासा, पर दुःो, उद्देश्यसाधन-मयमे उपरमै म्यान नहीं देनी गो। म अनु. मेहता धादि मगुणोंने उन्हें मना कर दिया था। नय विनय करने पर भी मदनने गाग्लानुमोदित- फिन्तु बकम्मा मी ममयमे कोई समापनीय पटनाप्नोत प्रायशित हारा फिरमे हिमागुन, मा गत उनके जीवनमवारको माग पचने ना। गादा। अन जोगिका.निये हेमा मादायका . । पर घटना उनमा धर्मप्रदान करनेके मिपा और ! अनुप्रदकाधी होना था। उसे माता पिता उनको