पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४४

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३८ मसहार-मसाला जिसके चारों पायों पर इस प्रकारका जालीदार कपड़ा । मसानी (हिं रखी० ) स्मशानमें रहनेवाली पिशाचिनी, लटकानेके लिये चार ऊंची लकड़ियां या छड़ लगे हों। डाकिनी इत्यादि । मसहार (हिं० पु.) मांसाहारी, मांस खानेवाला। मसार (स' पु०) मस भावे किए, मस परिमाण अच्छा मसहर ( अ० वि० ) मगहूर देखो। तीति ऋ उण् । इन्द्रनील मणि, नीलम। . . मसा (हिं पु०) १ शरीर पर कहीं फहों काले रंगका मसार-विहार और उडीसाके शाहाबाद जिलान्तर्गत उभरा हुआ मांसका छोटा दाना । यह वैद्यकके अनुसार एक वडा प्राम। यह अक्षा० २५ ३३ उ० तथा देशा० एक प्रकारका चर्मरोग माना जाता है। यह प्रायः ८४.३५ पू०के मध्य आरासे ६ मोल पश्चिम.ए. सरसों अथवा मूंगके आकारसे ले कर बैर तकयो इण्डिया रेलवेसे दक्षिणमें अवस्थित है । जनसंख्या आकारका होता है। यह शरीरमें अपने होनेके स्थानके तीन हजारसे ऊपर है। चीनपरिमाजक यूपनचुवङ्ग विचारसे अशुम अथवा शुभ माना जाता है । मशक देखो। इस स्थानको देख गये है। उनके भ्रमण-वृत्तान्तम २ घवासीर रोगमे मांसके दाने जो गुदाके मुंह पर या इस स्थानको मोहोशोलो (महासार ) लिखा है भीतर होते हैं । इनमें बहुत पीड़ा होती है और कभी और गङ्गातीरवत्ती बतलाया गया है। किन्तु घर्त- फभी इनमसे खून भो वहता है । ३ मच्छ। मान समय में गङ्गा यहांले ६ मील दूर हर गई है। मसाउनडिही-युक्तप्रदेशक गाजीपुर जिलान्तर्गत एक पहले इस स्थान हो कर जो गङ्गानदो वहती थी उसका 'प्राचीन बड़ा ग्राम। यह गाजीपुर शहरसे १२ कोस प्राचीन खात भाज भी मौजूद है । यहाँके पश्चिम गङ्गाके उत्तरी किनारे अवस्थित है । यह नगर पाश्च नाथ मन्दिरमे ७ शिलालेख उत्कीर्ण है। ममी श्रीभ्रष्ट और जनसाधारणसे परित्यक्त होने पर भी उन्हें पढ़नेसे मालूम होता है, कि मसारफा असल नाम प्राचीन कीर्तियां स्तुपाकारमें परिणत हैं। यह स्तूप 'महासार' है। इस स्थानका प्राचीन नाम शोणितपुर १५०० ४१००० फुट है। इसके अन्तर्गत एक टूटे फूटे है। इसी शोणितपुरमें वाणासुर रहता था। यहीं पर मन्दिग्में प्रतिमूर्ति दिखाई देती है । उस प्रतिमूर्तिमें जो ऊपादेवोके साथ धोयष्णके पौत्र भनिरुद्धका विवाह शिलालिपि है उससे इस स्थानका प्राचीन नाम 'क्रेलु हुमा। यहाँके जैनमन्दिरमें बहुत सी हिन्दू देयदेयियोंको लेन्द्रपुर' जाना गया है। प्रतिमूर्ति और १३८६ ईमें खोदी हुई शिलालिपि पाई . ___ अलावा इसके युधपुर और जोहरगञ्जके समीप गई हैं। इस प्रामसे पश्चिम जो ईटेका स्तूप है उसमें से (मसाउन डिहोसे आध कोस दक्षिण ) व जुलावन | बहुत सी योद्धमूर्तियां निकली है। यद स्तूप चेय- नामक स्थानके ध्वंसावशेषसे बौद्ध युगको फुछ मुद्राएं राजवशको कीर्ति माना जाता है। इसके अलाया यहां और मौर्य अक्षरमाला उत्पत्तिविषयक उपकरणादि बहुत-सी स्वच्छसलिला पुष्करिणी है। यहां बसाय. पापे गये हैं। यहांसे दक्षिण-पूर्व गङ्गाके फिनारे खेया | शेपसे एक प्रकाएड मूर्ति पाई गई है। यह मूर्ति भगो नामक उच्चभूमि पर फुछ हिन्दू देवदेयियों की मूर्ति इधर आरानगरफे सरकारी उद्यान में रखो हुई है। उधर पड़ी नजर आती हैं। इस स्थानका प्राचीन नाम | मसारफ ( स० पु०) मसार-साथै फन् । इन्द्रनील धनपुर है। यहां मीर्य अक्षरमें लिखित राजा धनदेवको मणि। ताम्रमुद्रा पाई गई है। मसाल ( अ० सी० मसान देना। मसान (हिं० पु० ) १ यह स्थान जहां मुरदे जलाए जाते मसालचो (फा० पु०) मशालची देखो। दों, मरघट । २ भूत पिशाच आदि । ३ रणभूमि, रण- मसालदुम्मा (हिं० पु० ) एक प्रकारका पक्षी। इसकी क्षेत्र । । 'दुम विलफुल काली रहती है। मसाना (अ० ० ) पेटको यह थैली जिसमें पेशाय मसाला (हिं० पु०) किसी पदार्थको प्रस्तुन करने जमा रहता है । मूसाराय देखो। 1 लिये आवश्यक सामनो। २ आतिशयाजी। ३ तेल,