पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४७७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


.मानसिंह . मृत राजा भोमसिंहकं अनुगृहीत सामन्तगण उनके | कर दिया। युद्धके प्रारम्भमें इनके अधीन जो सत्र राठोर विरुद्ध खड़े हो गये। अपने सामन्तोंके प्रति अनुग्रह सामन्त थे वे सबके सब इन्हें छोड़ चले गये। दोनों दिखलानेके कारण भट्टजातीय राजपूत सेनादल और पझमें घमसान युद्ध होनेके बाद राजा मानसिंहने मेरता- महन्त कायम दासके अधीनस्थ विष्णुस्वामी नामक सेना-1 से योधपुरदुर्गमें जा कर आश्रय लिया। जगत्को सेनाने दल मानसिंहफे पर.में थे। वहां तक इनका पीछा किया था। • इस पक्षपातिपत्य पर कद्ध हो कर सवाई सिंह भीम ____ मानसिंह जोधपुर दुर्गको ढ़वद्ध तथा झालोर और सिंहके पुल धनकुलका पक्ष ले कर अन्यान्य सामन्तोंके | अमरकोटमें सेना भेज कर शतुकी बाट जोहने लगे। साथ राजा मानसिंहके समीप गये। उन्होंने जातवालक जयपुरपति जगतसिंह पांच महीने अवरोध करके भी कुछ के भरणपोषणके लिये नागर और सिवोना प्रवेश मान- न कर सके । मानसिंह अंसीम वीरताके साथ आत्मरक्षा सिंहसे मांगा । इधर राजकोपसे पुत्रके अमङ्गलकी | करने लगे। इस समय जयपुरकी सेनामें घेतनभोगी आशङ्का कर भीमसिंहकी रानीने सबके सामने कहा, कि अमीर खाँका सेनांदल यागी हो गया। उन्होंने जगत्- धनकुल मेरा गर्भजात पुत्र नहीं है। इससे व्यर्थमनोरथ सिंहके विरुद्ध अस्त्र उठाया ।' प्राणके भयसे जगत्- हो सवाईसिंह फिरसे पड़यन्त्र रचने लगे। इस बार भी सिंहने रणक्षेत्रका परित्याग किया, साथ साथ सवाई उनकी चेष्टा सफल न हुई। ये राजा मानसिंहका आनु- सिंह भी अपने मगरको भागे। गत्य कार करनेको वाध्य हुए। उन्होंने चुपकेसे भीम युद्धके शेषमें अमीर खों और हिन्दूराजने राजा मान- सिंहकी लड़की कृष्णकुमारीका विवाह संबंध ले कर जयः सिंहको खासी मदद पहुंचाई थी। पीछे राजा मान- पुरराजके साथ झगड़ा खड़ा कर दिया। पहले मेवार- | सिंहने उन दोनोंको उच्चपद और काफी धनरत्नं दिया राजाके साथ कृष्णकुमारीकै बिधाह होनेकी बात थी।| था। इसके बाद मारवाड़ राज्यमें अमीर खाँका प्रभुत्य मानसिंहने जयपुरराजके इस अपमानजनक प्रस्ताव पर विस्तार, नागरदुर्ग और नोया दुर्गमें सैन्यस्थापन तथा उत्तेजित हो जयपुरराजके दिये हुए उपहारोंको लूटा और मैरात और शाम्भरप्रदेश में अधिकार फैलाते देन राजा सेनादलको परास्त किया। मानसिंह बहुत चञ्चल हो गये। इस समय हिन्दू ____ इस सूत्रसे दोनों पक्षमें घमसान लड़ाई छिी। और राजगुरु देवनाथको गुनमावसे निहत कर मान- सवाईसिंह इस प्रकार शठता द्वारा जयपुर और मेधारके सिंहका दिमाग खराब हो गया। - अनन्तर उनके पुत्र 'राजोंके साथ मानसिंहका विवादनल प्रज्वलित कर छत्रसिंहने राज्यभार ग्रहण किया। छलसिंहकी दुश्च. अपना मतलव निकालनेका उपाय दृढने लगे। इस रिनतासे सभी सामन्त विद्रोही हो गये । राजा मान. समय चे धनकुलको ले कर जयपुरके शिविर में गये। सिंदका दिमाग जव ठिकानेमें आया तब उन्होंने फिरसे 'जयपुरराज जगत्सि हफी जो पहिन भीमसिहको प्याही | राज्यभार ग्रहण कर अगरेजोंकी सहायतासे 'सामन्तोंकी गई थी उसीके गर्भसे धनकुलका जन्म हुआ था। भूसम्पत्ति छीन ली। ... '.' " . . . _राजा जगत्सिंहने भांजेका पक्ष ले कर राजा मान- ... १८०३ ई० में इष्ट-इण्डिया कम्पनीके साथ मानसिंह सिंह के विरुद्ध हथियार उठाया। उनके अधीन जितने । · को सन्धि हुई। मंगरेजी सेनाने मारवाड़के राजाका सामन्त थे, सोने उनका साथ छोड़ दिया। उन्होंने लाई पक्ष ले फर सामन्तीको उचित दण्ड दिया। १८१८६०- लेकके युद्धमें जिस होलकरपतिको आश्रय दिया था, की सन्धिके शानुसार मि चार टिश गवर्मेएटके प्रति- अभी ये उन्हींको शरणमें गये। किन्तु सवाईसिंहने लाख · निधिस्यरूप अजमीर प्रदेशके सुपारेण्टेण्डेण्ट वन र रुपये दे कर होलकरको कायमै कर लिया ,और इस योधपुर राज्यमें आये। उन्होंने मारयाहको राजनैतिक

प्रकार मानसिंहको ताफत घटा दी। इसके बाद जय अवस्थाका संस्कार करनेके लिये चुपकेसे राजा मान-

पुरकी सेनाने पिङ्गोलो नामक स्थानमें इन पर आक्रमण | सिंहफे साथ मिलना चाहा। किन्तु मिल म सके और