पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४७९

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मानइन्-मानक ४२१ मानम् (सं०नि०) मानं हन्ति हन-किए। मानहन्ता, { मानाङ्ग लमहातन्त्र (सं० को०) प्राचीन तन्त्रभेद ।।।। अप्रतिष्ठा करनेवाला। . . . ., . मानानन्द (सं० पु.) एक योगाचार्य । - शक्तिरताकरमें मानहानि (सं० स्त्री०.)-मानस्य हानिः। अवमानना, ! इनका नामोल्लेख है। ।, --

- वेइजती। ... मानानयन (सं० ली०)मानस्य परिमाणस्य भानयनम् । मानहीन (सं० वि०) मानेन हीनः। मानरहित, मानभ्रष्ट, | परिमाण आनयन, गणना कर परिमाण स्थिर करना। जिसकी अमतिष्ठा हुई हो। । ज्योतिष में रवि आदि ग्रहों का मानानयन,स्थिर कर गणना मानहुं (हिं० मध्य०.) मानों देखा। करनी होती है। विशेषतः ग्रहणगणना करने समय माना (हिं० पु.) १ एक प्रकारका मीठा नियांस। यह रवि, गौर चन्द्रमाका मानानयन विशेष -आवश्यक है। इटली और एशिया माइनर आदि देशोंके कुछ विशिष्ट | मानायन (:स पु०-) मनायनका गोतापत्य । , वृक्षों में छेय लगा कर निकाला जाता है। अथवा कभी मानाय्य (सं० पु० ) मनाययका गोलापत्य ।।:: कभी कुछ कीड़े. आदिको कई क्रियाओं से उत्पन्न होता | मामाय्यानी (स' स्रो०) भनाध्यको स्त्री अपत्य । है। यह पीछेसे कई रासायनिक क्रियाभोंसे शुद्ध करके | मानार उपसागर--भारतवर्ष के दक्षिण में अवस्थित भारत- ओषधिके काम में लाया जाता है। भारतके कई प्रकारके महासागरका अंशविशेष -।, इसके पश्चिम तिन्नेवल्ली बाँस तथा अनेक गृक्षों पर भी.; यह कभा. कमी, पाया और मदुरा जिला, उत्तरमें आवामस विज (सेतुबन्ध जाता है। यह रेचक होता है और इसका व्यवहार करनेसे द्वीप ) और कुमारिका यादि पर्वतमाला तथा :पूर्वमें मनुष्य बहुत नियल नहीं होता । देखने में यह पीले रंगका, सिंहलद्वीप है । कुमारिकास दि-गल अन्तरीप तक इसका पारदशी और हलका होता है और प्रायः बहुत , महंगा ..फासला .२ मील है। दक्षिण पश्चिम मानसून वायु मिलता है। :२ अन्नादि : नापनेका एक पात्र जिसमें बहने से इसका नत बहुत प्रगर हो जाता है। उनके पाव भर अन्न शाता है। यह लकड़ो, मिट्टो या धातु- परिवर्तन समयमें भी शर्थात्-उत्तर-पूर्व मानसुन यायुके 1 का बना होता है। इससे तरल पदार्थ भो नापे जाने .वहते समय या पश्चिमी वायु बहती है तथा स्रोतमें भी ' हैं। ( क्रि० ) ३.नापना, तौलना। ४. जांचना,":परीक्षा! . बहुत अन्तर दिखाई देता है। इस समय जलस्रोतसे करना!::. ..

. मलवार उपकूलका यालू कुमारिका अन्तरोपके दक्षिण जा

माना-युक्तप्रदेशले गढ़याल : जिलान्तर्गत : एक गिरि-कर जमा होता है। यहां मुक्ता पाई जाती है। मुसल; सङ्कट। यह अक्षा० ३०० ५७ उ० तथा- देशा०,७८] मान और तामिल गोताखोर समुद्र में डुवको मार कर ३५ पू० हिमालय शिखरमें चीन और भारत साम्राज्य- शंग्न, सीप, मोती भादि निकालते हैं। टिश सरकारने के योचमें अवस्थित है। विष्णुगंगा नदीके किनारेसे इसकी हिफाजत के लिये अच्छा प्रबन्ध कर रखा है।..:: माना उपत्यकास्थ मानागांवमें जाया जाता है। समुद्र- मानाराय--वम्बई प्रदेशके काठियावादफे सौराए-विभागा- पृष्ठसे यह रास्ता १८ हजार फीट ऊंचा होने पर भी न्तर्गत एक छोटा सामन्तराज्य । यहांके राजा यष्टोदाराम पहले भारतवासी इस सङ्कट हो कर चोनतातार, जाते | और जूनागढ़ नवावकी कर देते हैं। आते थे। हिन्दतीर्थयाती इसी हो फरः मानसरोघर मानासक (सनिक-१.अभिमानो । २मानरक्षा ही तीर्थ जाते हैं !.. .-:.:.. : । जिसका मूलमन्त हो। :- ....... . मानाङ्क:(म. पु) एक पुस्तक प्रणेता ।, इन्होंने गीत मानिंद (फावि०):समान, तुल्य ! ! गोविन्दकी रोका, : दुर्गमाशवोधिनो... नामफ' मालती मानिक ( स..क्लो०) आठ पलका एक मान ! माधवको टोका: मेघाभ्यूदय:माध्य, पृन्दावनयमक और मानिक (हिं० पु) एक मणिका नाम । त्यह. लाल रंग: न्वायन काध्य रचे । माला नामसे भी परिचित थे। का होता है भार हीरको छोड़कर सदसे कड़ा पत्थर है। मानाङ्का राष्ट्रकूटवंशीय एक राजा। इसमें विशेषता यह है, कि बहुत अधिक तापसे, सहारीके - . Vol. xv.1. -10G,