पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४८०

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४२२ मानिकखम्भ-गानुषक ।' योगसे यह काँचको भांति गल जाता है और गलने पर। "हरिरभिसरति वहति पूदु पवनें । ; . . . . इसमें कोई रंग नहीं रह जाता। मानिक पत्थर गहरे किमपरमधिकसुखं सखि ! भवने ' : ...:. : . लाल रंगसे ले कर गुलाबी और नारंगीसे ले कर पैंगनी । माधवे मा कुरु मानिनि ! मानमये ॥"' . . . रंग तकके मिलते हैं। जिस मानिकर्म चिह्न नहीं होते (गीतगोविन्द हार).. और चमक अधिक होती है, वह उत्तम माना जाता और | ३साहित्यमें वह नायिका जो नायकके दोषको देख अधिक मूल्यवान होता है। ___ | फर उससे राठ गई हो। ४ मान करनेवाली, कंटा । ५ विशेष विवरण मणि शब्दमें देखो। राजा राज्यवर्द्धनको पत्नो। ६ शराय परिमाण, पक - मानिकखम्भ (स.पु) १ वह खूटा जो कातरके किनारे । सेर। गड़ा रहता है और जिसमें धुसेको रस्सीसे बांध कर मानिन्ध ( स० पु०) एक प्राचीन ज्योतिर्विद । ' जाटके सिरे पर अटकाते हैं, मरखम । २ विवाहमें । मनिस्थ देखो। मंडपके वीव गाड़ा जानेवाला एक खंभा। ३ मालखंभ, मानिमन्मथ ( स० को०) सैन्धव लवण, सेंधा नमक। मलखम। मानो ( स० त्रि०) १ अमिमानो, घमंडी। २ मनोयोगी। मानिकचंदी (हिं० स्त्री० ) साधारण छोटो सुपारी। । ३ सम्मानित, गौरवान्वित । (पु. ) ४ सिंह , ५ मानिकजोड़ (हिं पु०) एक प्रकारका बड़ा बगुला | साहित्यमें यह नायक जो नायिकासे अपमानित हो कर जिसकी चोंच और रागें लयो होती हैं। रूठ गया हो। (स्रो०)६ कुभ, घड़ा। प्राचीन मानिकजोर (हि.पु०) मानिकजोड़ देखो। कालका एक प्रकारका मानपान। इसमें दो अंजुली या मानिकरेत ( हिंस्रो०) मानिफका चरा। इससे गहने आठ पल भाता था।' ८ साधारण छेद । कुदाल, साफ किये जाते हैं और उन पर चमक लाई जाती है। वसूले भादिका वह छेद जिसमें में लगाई जाती है।१० मानिका (सत्रो० ) मानयति गवीं करोतीति मन भन्नका एक मान जो सोलह सेरका होता है। ११ णिच् ण्वुल, टाप भकारस्पेत्वं । १ मध, शराब। २, किसी चीजमें बनाया हुआ छेद जिसमें कुछ जड़ा जाय। , माठ पल या साठ तोलेका एक मान । वैद्यक-मतसे १२ चकीके ऊपरके पाटमें लगी हुई एक लकड़ी। इसके साठ तोलेका एक सेर होता है। योचके छेदमें कीली रहती है। जूभा न होने पर यह मानिटर (मपु०) पाठशालाको श्रेणियों में एक प्रधान | लकड़ी ऊपरके पाटके छेदमें जड़ी रहती है। छात्र। यह अन्य छात्रों पर कुछ विशिष्ट अधिकार | मानी (अ० स्त्री०) १ अर्थ, मतलब, तात्पर्य । २. तरये, रखता है। . . . · रहस्य । ३ प्रयोजन। 8 हेतु, कारण। मानित (सं० वि० ) मानोऽस्त्यर्थे तारकादित्यादितच । मानुतन्तथ्य (सं० पु०) १ मनुतन्तुका गोलापत्य । २ सम्मानित, पूजित। ऐकादशाक्षरका अपत्य। मानितसेन (संपु०) राजपुत्रभेद । | मानुष (सं० पु०) मनोर्जातः मनु (मनोर्जावावम् यतो युरु ।। मानिता (सं० स्त्री०) मानिनो भायः तल-राप। १ च ! पा ११९६१) इत्यत्र युगागमश्च । १ मनुष्य, . मानोका भाय या धर्म, मानित्य, सम्मान, आदर। २/ मानव । २ याचवल्पय स्मृतिके अनुसार प्रमाणके दो गौरव । ३ अहकार, गर्व। . भेदों से एक। इसके तीन उपमेद है-लिखित, मुक्ति मानिन (सं० लि०) १ मानोऽस्यास्तीति मान-नि। १ और साक्षी। (नि०) मनुष्यसम्बन्धी, मनुष्यका । मानविशिष्ट सम्भ्रान्त । २ सिंह। . "मकृत्या मानुष कर्म यो देवमनुवर्तते। - मानिनी (सं० खो०) १ फलिवृक्ष, लक्षणाकन्द । मानिन् या भाम्यति समाप्प पति श्लोवमिवानना ॥" .. स्त्रियां डीप। २मानयती, भभिमानयुक्ता स्त्री, गर्यवती । ( महाभारत १३।६।२०) 'औरत। . .. मानुपक (सं० लि०) मनुष्यसम्बन्धीय, मनुष्यका 1. "