पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५१३

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पारवाई ४५७ - राजधानी स्थापित की । वण्डने नान्दोल और नागोर-| राणा संग्रामसिंहका पक्ष लै' कर मुगल बादशाहके गढको देखल कर लिया था। इन्होंने परिहारको राजपुत्री विरुद्ध वियाना (मतान्तरसे खानुया) रणक्षेत्रमें घोर युस इन्दुमतोसे वियाह किया।' '... ' ' किया। इस युद्धर्भ गंगारायके पोते रायमल मारे गये। चएडके चौदह लड़के थे। इनमें रणमल, सत्य, इस दुर्घटनाके वाद गंगाराव चार वर्ष जीते रहें। अरण्यकमल और काणके यंश अभी भी मारवाड़में वर्स- ___गंगाराबको मृत्युके पश्चात् मारवाड़के कुलरवि माल. मान है।"घण्डकी इसा नामक एक लड़कोका विवाह । देव राठोर सिंहासन पर सन् १५३२ ई०में मारुढ़ हुए। मेवाड-पति राणा लक्षके साथ हुआ था। इस कन्याके इन्होंने नागोर, अजमेर, झालरापाटन, शियनो, भद्रार्जुन, बीकानेर, विक्रमपुर आदि स्थानोंको अपने शासनमें कर गर्मस राणा कुम्भ उत्पन्न हुए। इस विवाहको ले कर | लिया। इन्होंने समिर मोलके नमककी बायसे राज्य. मेवाड़ गौर मारवाडके धोव घोर शल ता चली थी। रक्षाके लिये मालकोट और भद्रार्जुन दुर्ग बनवाये। . सन १४०८ ६०में राय चण्ड स्वर्गवासी हुए। पीछे वन- इन्हींके वाहुवलसे सुजात, सांभर, मेरतिया, खाता, के बडे लडके रणमल सिंहासन पर बैठे। ये भी पिताका घेदनरालादनं. रायपर, भदान, नागोर, शिवानी, जैसे शक्तिशाली थे। इनका चलाया हुआ तौल परिमाण | लोहगढ़, जयकलगढ़, बीकानेर, भिल्लमाल, पोकर्ण, पाय, अभी तक मारवाड़में प्रचलित है। इनके २४ लड़के थे। कुशली, रेवास, जाजावर, झालोर, वाचली, मूलार नादोल, बड़े लड़के योध राव पिताके भरने पर गद्दी पर बैठे और फिलोड़ों, सांचोर दीदवानी, चात्सु लोयाइन, मुलरना, कन्दल, चम्पा, अविराज, मण्डल, पट्ट, लापा, वाला, देवरा, फतेहपुर, अमरसर, खबर, पनियापुर, टॉक; थोड़ा, जैमल, कर्ण, रूप, नाथ, दुगर, सन्द, मन्द, वीर, जगमल, अजमेर, जहाजपुर और शेखावटी प्रदेश मारवाड-शासना. हम्पू, शक्त, फरमचंद, अरिवल, फेनुसिंह, भानुशाल और भुक्त हुए थे। । . तेजमल नामके शेष-२३ लड़के भिन्न भिन्न प्रदेशके सामन्त इसके दश वर्ष बाद इनको भाग्यलक्ष्मीने मुंह फेरना हुए थे. इन २४ लड़कोंसे २४ शाखाये निकलों। . भारम्भ किया। सन् ' १५४४ ई०में दिल्ली के अफगान inयोधराधने राजा होने पर अपने भुजवलसे सुजात राजा-शेरशाह' ८० हजार सेना ले कर मारवाड़ पर चढ़ आदि देश जय किये। इन्होंने सन् .१४५६ ई० में मन्दौर भाया । शेरशाहको 'जय हुई, लेकिन उसकी सेनाको राजधानो छोड़ वर्तमान जोधपुर वसाया और यहीं राठोरोंके हाथं दड़ी क्षति उठानी पड़ी। अपना राजपार उठा लाये। बादमें इनके लड़के.सूर्यमल सन् १५६७ ६०में मुगल-बादशाह अकबरने मारवाड़ पर सिंहासन पर बैठे।. राजा, योधरायकेः शान्तल, सूर्य, चढ़ाई को 1 मुगल सेनाने मालकोटं या मेरतागदकी घेर गुम, दुदो, विको, भोलमल, शिवराज, कम्मसिंह, ..राय- | लिया। इसके बाद विजयके आवेशमें मुसलमान सेनाने मल, सामन्तसिंह, विदा, यनह और निम नामक १४ भीमवेगमे दुर्भद्य नागोरगढको भी जीत लिया। बाद- लड़कोसे१४:शाखाओं और सामन्त राज्योंकी उत्पत्ति शाइने अपने अनुगृहीत शिवोकी दूसरी शाखाके वंशधर विकानेरपति रायमलको इस प्रदेशका शासक बनाया। राजा सूर्यमलके भाग्य, उदय, स्वर्ग, प्रयाग और मालदेवका भाग्य क्रमशः बढ़ने लगा। इस समय विरामदेव मामके पांच लड़के हुए'। इन पांचोंसे बादशाह अकदर भारतवर्ष में 'मुगल-साम्राज्यको पढ़ा पांच शाखाए' निफलों । सूर्यमल रायको मृत्युके रहे थे। मुगल सेनासे बार बार पराजित ही उन्हें सन् वाद माव्यके लड़के गंगा राय सन् १५१६: १०में राज-! १५६६ ६०में बादशाहकी अधीनता स्वीकार करनी पड़ी। गहो पर बैठे। उस वर्ष इन्होंने दौलत खा लोदीको अधीनता दिखलानेके लिये उन्होंने अपने पुत्र चन्द्रसनः हराकर अपना राज्य सुदृढ़ कर लिया। सन् १५२८ को नजरानेके साथ मुंगलवादशाहके पास अजमेर भेजा। ईमें इनको राठोर सेनाने पड़े विक्रम के साथ उदयपुरके बादशाहने उनके इस व्यवहारस क्रोधित हो रायसिंहको Vol. XVII, 113