पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५४४

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पानदह उक राजधानी हर मापसे देखने में आते , ! को भी शमन लगती है। यहां पहले गोल बहुत उप. सैकमों यय ना गौड़ और पापर नमें हिन्दू नया आई जाती थी, अभी भी गढ़ाये. किनारे पर उपजाई मुसलमानों की राजधानी थी। महानन्दा और गंगाका जाती है। यहांसे रेशमो सूने, धान, चायल, नने जा, मायनी भृमाग प्रायः २० वर्गगर। भाम और पटसनको रफतनी तथा नारियल, सुपारी, गौष्ट्र भार पोपट देना।। भी, गुड़, ताये, पीनल भादिको भामदनी होती है। मुसलमान भासन याहुन पहलेसे गोद बङ्गालको विद्याशिक्षा या जिला यहुन पोछा पट्टा गुमआ है। राजधानी मा । जिम वर्ग (अर्थात् १७७५ ईस्वीमन्में) ' मंकड़े पीछे घार मनुष्य पढ़े लिये मिलते हैं। अभी , मायरने पठानोको हराया था उमी वर्ष महामारीके कुल मिला कर ५०० स्कुल हैं। फलो भलावा im. प्रकोपसे गौड़ नगर जनशून्य दो गया। उस समयमे ताल भी हैं। पंगालफे मुसलमाग शामनकर्ता रातमालमें राजा २ उन जिलेका एक पुराना विश्वस्त नगर। यह पानी उठाने गये। पण्भाचा हा गौहमे २० मोल अक्षा० २.३.३० तथा दे० ८८८०के मध्य उसरपूर्ण अयस्थित है। अफगान गनाओने यहां १४यों कालिद्री गौर. महानन्दा नदीयो मद्गमस्थल पर मा. मनाम्दीमें राजधानी यमाई । दमका भग्नावशेष बने स्थित है। भूपरिमाण हजार के करीब है। बालरो घिरा होने के कारण अय नक भी घार गोका त्यों मालदह नगरके नागानुमार मालदद जिलेका मामः मौजूद है। पण्डाकी अदीना मसजिद भारत गठान करण हुया है। अभी सदर स्टेशन गरेम-बाजार स्थापत्य-गिरायका चरमोत्कर्ष है। पटानों को पनार नगरको मालदह कहते हैं । किन्तु असल गालददनगर मारनौम जो मरमर पत्थर है ये हिन्दुओंके भग्न मन्दिरमे ' यहां तीन फीस उत्तर महानन्दाफे पूर्वी किनारे भर. लिये गये हैं। किन्तु गोडो भग्नावशेषमें येगी ईटही स्थित है। अमी असल मालदहको पुगना मालदद दिग्गाई पनी है। मालदह जिलेके पश्चिम नांडा नगरी कहते हैं। पुराने मालदहफे सन्तात एक स्थानमा का सएहर इसकी पूर्व भयस्थिति गलाके गतिपरि- नाम मालदद है। यहां पढ़न-सी का देगी माती हैं। पसनमे नष्ट हो गई है। गौए नगर शून्य होनेने मी वर्ष उस छोटे मपानका नाम मालदद फ्यों पहा, उसका तक बगालफी राजधानी नांग्या होमें थी। संतोषजनक कारण माज तक कोई नहीं पतला सका। १६ म्योमम्मे मालद:फे माग पहिया वाहुनौका कहना है कि यहां मालयपोरकी का है। उसी फम्पनी (प्रानप यणिकममिनि ) का संयभा है। पोरके नागानुमार मालम माम मामी भी नहीं कर इम माय शहरेजोने गहां रेशमकी कोठी गोली।। सकते। मारजातिय मालदका नाम गुभाई ऐसा १७७००सनमें मालदहका मनोज थासार प्रधान : भी यदुतोका अनुमान है। याणिज्यके लिये इस नगर. पाणिज्यको पेन्द्र माझा गरा। उसके वारकी की यहुत गलगि दुई थी। शिम समय मालदह नगर प्रणालोमे बनी हुई महरेजों को कोठो भाज भी मौजूद है। पाया गया उसका कोई प्रमाण मास तक नहीं मिला १८१३०मनमे वर्तमान मालदा जिलेगी मष्टि है। है। मम्राट फिरोज तुगलक रम नगरफे जिम गर्ने १८३२९०सन्म यदी राजकोर स्थापित हुमा । म्योमन् | हानी डाल कर पाएमा पर गढ़ाई करनेका उद्योग १८५६ मे यहां मनिष्प्लेट पाल नियुक्त हुए। कर रहा था, उसका नाम पिरोमपुर है। कोई को मनिलेको सनसंग नागफे करोष। यहां कहते है कि पागर माता पण मंना परने के पाम और बिहार के समय मादिग अधियामी नगा लिये जो यमर कोटा गया था यदी माग्दा सिम हिमाय मर छोटानागपुर. पानी लोग भो अधि! गरम गरम वन गमने । पोरगा गाभा- मंगपा ने पाते । मुगलमानों की संख्या र तयारी, मम मोर महानन्दाः रिनार पगामा। यही प्रगान TTER है | गई. नो र जग्गः पोरगा ममी गाना माहागनामें भाका .