पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६०

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. पस्तु-महद अवसरों पर होता है। ४ यह प्राय जो कुछ विशिष्ट ; महंडा (हि० सी० ) भुने हुए चने।.. . पशुकि मस्तक, कान, आंस आदिक पाससे कुछ सास महंत (हिं० पु०) १साधु मएडली या मठका मधिष्ठाता, , • अयसरों पर, विशेषतः उनके मस्त होने समय होता है। साधुमोंका मुखिया। (वि०)२ श्रेष्ठ, प्रधान !. मस्तु (स .) मस्पति परिणमतोति मस (मित-महंती (दि० सी० ) १ महंतका माय । २ मतका पर निगमिमरिगुत्र्य विधाम् ऋगिम्यस्नुन । उग्ण ११७० ) इति मादी (हि. रत्री०) मेंहदी देसो। ।. तुन। १ दधिगधमएड, दहीका पानी। जितना हो | मह (स' पु०) महते पूज्यतेऽस्मिन्निति मह (ga orat हो उससे दूना जल डाल कर मथना चाहिये। इसीका या प्रायेण । पा ३३११८) इति घ, यहा महामस् नाम मस्तु है। इसे महा भी कह सकते हैं। इसका (उग्ण ४११८८) १ उत्सप। महते पूज्यते इति। २ गुण उण और अम्ल, मधिकर, पित्तयर्द्धक, धमनाशक तेज। ३ यश । ४ महिप, भैसा (त्रि०) मा पलकर, तृष्णा, उदरी, लोहा और मनाशक, श्रोत: बड़ा। ६ अति, यात । शुद्धिकर, कफ और वायुनाशक, विष्टम्भ, शल. पाण्दु, महफ (सं००) १ महत् व्यक्ति, श्रेष्ठ पुरुष । २ कप वास, विकार और गुन्मरोगमें विशेष उपकारो तथा फछुया। ३ विष्णु। लघु माना गया है। २ छेने का पानो.। महफ (६० स्रो० ) गंध, यू। मस्तुलुङ्ग (स० पु०) मस्तु इय लिङ्ग सादृश्यममा, पो. महकदार (हि० वि० ) जिसमें मह फ हो, महफयाला। दादियात् इशारसा उमारः। मस्तिक, मगा। महकना (हि. फि०) गघ देना, यास देनाः। .. मस्तुलुक (सपु०) मस्तुलुस्सायें कन् । मस्तिष्क, महकमा ( म०पू०) किसी विशिष्ट कार्यो लिये मलग मगा। किया गुभा विभाग, सरिश्ता। मस्तूरी ( हि० स्रो०) धातु गनानेको भट्ठी। महकाली ( हि० सी०) पार्यती। मस्तूल ( पुतं. पु. ) घड़ी नार्यों आदिफे यीचमें राहा महफीला (हिं० यि०) सुगंधित, महफदार । ' गादा जानेयाला यह यहा लढा या शहतीर जिसमें पाल महया (सं० पु०) महः कापति प्रकाशयतीति गहस केक, ', यांधते हैं। पृषोदरादित्यान् साधुः । बहुल आमोय, ददसे ज्यादा मसनर-माला-आदिल गां-इस लाम शाहका एक ममा | खुशी। सह। कुछ दिन याद यह अकयर नादगाइके कर्मनारोमहरम ( हिं० पु. । सूर्य। पद पर नियुक्त हुआ। ८६० हिजरो नगरकोटमें जव म ( ० यि०) १ शुभ मालिसं। २ मेपल, मास । घेरा डाला गया, उस समय यह होसेन फलो जहान महजरनाम ( 7. पु.)हरपा मगादत्यारे: का अधीन पदां गया था। तबकम् पढ़नेमे मालूम साझीपत्र, दिमा पिपयफ माशीपर। " होता है. फियद २ जारी सेनानायक था। महमित-~-मजिद दे। मस्ता (हिं० पु०) मसा देती। मदण (हि.पु.) ममुद्रा महक (दि० रनो० ) माफ देखो। महत् । सं० त्रि०) माते त्योऽमी नि मह (पमा मकना (हि.f०) महकना देना। पालगन्तररूप । ठप राति मति मिपा. ' मांगा (हि. पिक) गधिर मुल्य पर विकनेयाला, स्प। १ पहन, यहा। पाप-विराट , पूर, जिसकी कीमत साधारण या उचितको अपेक्षा अधिक पिगाल, शुन, परकर पिपुल, पुल, पिस्नी : ' वैदिक पपांप-म. प. पु. शिवायर, मया ) माँगा देश , पिर, महिप. गह,समुता, उमा, पिदापस.पर यक्षिप Himilar wो.) मग धानका भाय, महंगापन ! पियक्षस, भम्भृग, माहिल, गौर, का, रभस, मा. २ मरेंगे हानेकी भयाथा। दुनिश, काल ! यिरपती, मन्नय, पंडित, पहिपत्। .. .