पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६१

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महत-पहत (पु.) २ प्रतिका पहला विकार। सत्त्व, रज | मंहताव धाग-यमुनाफे किनारे एक सुरम्य उद्यान । मुगल .और तमोगुणको समानायस्थाका माम प्रकृति है। जब बादशाह शाहजहान्ने यहां पर एक बड़ा मकान दमाया प्रकृतिका विकार उपस्थित होता है, तब उक्त तीनों गुण ! था। उनको इच्छा यो, कि मृत्युके बाद उनकी देह विरूप हो जाते हैं और उसोसे महत्को उत्पत्ति है। यहीं पर दफनाई जाय। किन्तु ऐसा नहीं हुमा । सो महत्से स्थावरजङ्गमात्मक जगत्को उत्पत्ति हुई है। पयोंकि उनके लड़के आलमगीर उस मकानको पेश-

, . . .: : महतत्त्व शन्द देखो। कीमती चीजें दूसरी जगह उठा ले गये थे। इसका

। शहादि शब्दके पहले महर शम्दका प्रयोग नहीं ' गएडहर आज भी देखने में आता है। करना चाहिये। महतायो (फा प्रो०) १ मोमबत्तोक भाकारको बनो “ग ने तथा मासे वैये ज्योतिषिके द्विजे। हुई एक प्रकारको आतिशवाजी। यह मोटे कागजमे यात्रायां पथि निद्रायां महच्छन्दो न दीयते ॥" यारूद, गंधक मादि मसाले लपेट कर बनाई जाती है। (भटि ४ लोक टीका भरत) इसके जलनेसे बहुत तेज रोशनी होती है। रोशनी - शङ्क, तेल, मांस, वैध, ज्योतिपिक, द्विन, यात्रा, पथ सफेद, लाल, नीलो, पोली आदि की तरहको होती है। • और निद्रा इन सब शग्दोंके पहले महन् शम्दका प्रयोग ! २एक प्रकारका बड़ा नीयू. चकोतरा। ३ फिसी बड़े नहीं करना चाहिये। | प्रासादफे आगे अधया पागके वोचमें बना दुमा गोल .३ राज्य | ४ मा एकमात्र ग्रह हो महत् शब्दफे या चौकोर ऊंचा चबूतरा। इस चयूतरे पर लोग रात. मभिधेय हैं। र के समय यैठ कर चांदनीका मानन्द लूटते है। "भूतेन श्रोमियो भवति तपसा विन्दते महत् । महतारी (हिं० सी० ) माता, मां। (भारत ३२३१२।४) महतिमान्ता सं० स्रो०) वृहतो, छोटी कटाई। । ५ उदक, जल। । महती (सरली. ) महत्-टीप। १ पसकोमेद, एक महत (हिं० पु.) महतत्त्व देखो। प्रकारको योणा। २ मारदको वीणाका नाम | ३ महतयान (हिं० पु. ) फरमें पोछेको भोर लगी हुई। । गृहतो, फंटाई। ४ यातांको, वनभंटा । ५ फुगोपस्य सो खूटी। इसमें तानेको पोछेको ओर कस कर खोंगे नदीविशेष, पुरानोपको एक नदीका नाम जो पारिपार रहनेवाली दोरो लपेट कर घरतले में पांघो जाती है। इसे हथेला भो कहते हैं। पर्वतसे निकली है। ६ महस्य, महिमा । येश्योंकी महता (हिं० पु० ) १ सरदार, गांयका मुखिया । २ लेखक, एक माति। ८ वह हिचको जिसमें मर्मस्पान पीड़ित मुंशो। हो और देहमें कंप हो। योनिका बहुत फैल जाना। महताय ( फाखी०) १ चांदनी, चन्दिमा। २ए। यह एक रोग माना जाता है। 'प्रकारको भातिशवाजी। महतारी देखो। ३जहाज पर । महतोद्वादशी ( स० सी० ) महतोति याता। बादशी, रातके समय संकेतके लिये होनेवाली एक प्रकारको , प्रायणवावगी। नीलो रोगनो। यह रोशनी काठफी एक नली में कुछ। "माम भारदे शुग्ने दादशी अयप्पान्पिता। 'मसाले भर कर जलाई जाती है। (पु०१४ चन्द्रमा मातीवादशी शेया उश्याम महाफला ॥" चांद । ५ एक प्रकारका जगलो कीया, महालत। (गाहपु. ११.) महनाव-हिन्दीफे एक कपि। इन्होंने संवत् १८००में भाठमामको शुका वादगोके दिन पदि भरणा नसत्र 'मसतिय नामक अन्य लिया। ये साधारण श्रेणोके पड़े, तो उमो दिनका माम महनी दायी । पार कवि थे। न्होंने हिन्दु-पतिकी प्रशंसा की है जिनके द्वादशी बहुत पुण्यजनक है। इस दिन म्नान दान उप. पहाँ दास कवि थे। इन्होंने उन्हें राजाफे स्थान पर बाद. याम आदि पुण्यकर्म मनन्त फलदायक है। शाह लिन दिया है। । महतो (दि. १०) १ गयायाल पंकी एक उपापि । Vol. XII. 16