पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६१८

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


- पिण्टी 'पर अधिशार कर पटान, पिएद्वारा मीर मुगट : दुरस दो फिलेको दोधार पर गोलायम होने लगा। भाविकी गहरापनासे पेरार भार राजपतो. गम्य पर , दल सैन्य किन्फे गौचे पो हो कर चहारदीपारी पर । भाममण किया। उनके अधीनमें दारों अभ्यारोही और चलनेकी कोशिश करने लगी। न्तु उमालम्पो चार मदनों पैदल पिण्डारी सैन्य थीं। मन् १८०६ ई०पं. जन, दीयारी पर गहन मानेफे कारण विपक्षी दलको भोरस : परी मदीन में उन्होंने नर्मदा पार कर जायलपुर पर आया- परयर टु गिरने लगे जिसने यहुने हो दिया। पेसर राज्यफे साथ अंगरेजोंकी मन्धि न हो। गये। सेनापति मश्नकार्य हो कर अपनी जानी मा किमी.इस भयसे मंगरेज सेनापतिने येसरको महा. , कर रहने लगे। दरियायने डर कर सम्धि कर ली। कुछ यता देनेगे लिये सेना भेजी, शि. दाक्षिणात्यमें अमोर दिन हुए अगरेजीन उमफिलेको तोड़ दिया है। काल. कहीं गये राज्यको मष्टि न कर दें। समोर मांने कहा, अरफे. राजा दरियायमित्य साध सन्धि भार तर गि मैं होलकर रायका सेनापति है। इससे मंधिके गजाफे साथ मिलना कर लाई मिण्टोने युन्दलगएटमें अनुसार में ही बंगरेजोंका साहाय्य पानेका हकदार है। कुछ शान्ति स्थापित को । गामुन कर दमको सत्यता जाननेके लिये होलकरके इसके बाद लाई लिएटोने दिप्सीको उत्तर पश्चिम पास का लिया और इसके उत्तर, उनको मालूम हुमा, सीमान्तप्रदेश हरियाना प्रदेशको अपने राप मिला कि याद मय ट है। इससे याद समोर ता अंगरेजोले लिया। पानीपतमे इसको गजधानी कायम हुई। गहों के विगत सा हो गया। किन्तु युनमें पराजित दो फर प्रघियासी जाट मुगलोंको अधीनगाको अयोकार कर पद भूपाल भाग गया। सेनापतिने यहुत दिनों तक साधीनतापूर्वक राज्य पारने थे। जाम टामग नाम पर येतर सेन्य राना भासद्गत समझ यहाँसे लौट आने की आगरलेगडयामी मंगरेज सेनापनिने सन १७८१६०में भासा भेजी पोर येतरराज्यके माय सैन्यसाहाय्य देनेको गरेका कार्य छोढ़ दिलीय उत्तर-पश्निा देशी गाया प्रनिशा कर संधि फर ली। की। जारोंको गनी येगा समस्या यदा जाटाममः मो ममय गोपालसिंह नामक एक दूसरे पराकान्त, काम करने लगे। येगमका सेनापति यन र ये अपनी मरदार फोरराराज मतसिंहको भगा कर अपना ऐश्वर्य फार्षदशनाफे गुणमे उनका प्रियपास पग गये। पार केटा रहे थे। इससे मंगरेज सेनापतिके पेटमे , येगमका राज्य विगष्ट होने पर उन्होंने दूसरे पर जाटणे, नमा गृदने लगा। गतः ला मिएटोने गोपालमिदको यहां मनापतिका काम कर दिया। अन्त में जब उना १८ गायों की जमीन्दारी देकर उनके साथ मन्धि कर जाट सरदारको मृत्यु हो गई, तो रामसने अपनेको यो। म्याधीन होनेको घोरणा कर दी। यह सन् १९७० युन्देलगाएतय भरतारासी कालसर गुर्गके नामनामां' को घरनाई। साधारपा उनको आरिम मा में दरियायमा मंगरेजीके प्रभुत्यको जरा मी पायान में उन्होंने करायः भाने राज्यको गति फरमा मारमा पर निगायस रायका शासन कर रहे थे। फाल. रिया।हामी नामक स्थानमें उनकी रामधामो गीमिम् शुर पहातो दुर्गमें उनका यासस्थान पा। यह दुर्ग राय मंगल मंगापति पग्न ( Irron ने रामम १०५ फोट अंचे पफ पर्वतको बगल में गा धार इमफै : राय पर नहा को ! रामराम मिल पा . मागे गोर निविड़ अपमारपूर्ण अंगर या । यरियायसिंहमग त्याग कर मदेव नौट गागेको रामनदान अपने किसी भी देना चारों और मेरमंट कर' मान लिया। रमन. १८०२०ी पटना। भरमा रामविस्तार कर रहे थे। मन् १८०० मंग, में यह मपुरमें उE P?यु हो गई। AE -मेगालि काला मागु प्रकार के उन'; गंगरेजी मे रामें मिला लिया। पर माझn it anो ! 4451, ....... . .. .. . पर मालमें गाने का रास्ता ना घर असर मिरोही मधि ।