पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६९८

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६२२ पिसे प्राचीन मिस्र ज्यामिति और विकोणमितिको जो! सुप्राचीनकालमें लोग यन्जका व्यवहार अच्छी तरह मम्पक परिचालना हुई थी, यह पिरामिड निर्माण- जानते थे। नाना प्रकारफे यन्त्रों का चित्र पिरामिट प्रणालीको आलोनना करनेसे जाना जा सकता है। तथा पर्यंतों पर खुदा हुआ है। उनका नाम और ध्यय. आम ( Irfon) मन्दिरमें जो ज्यामितिका फौशल हार बाज कंलके युगमें अज्ञात है। तराजू, घटसरे दिलाया गया था उससे ज्यामितिके बनानेवाले | मादि सैकड़ों प्रकार यन्त्रों के नमूने मिलते हैं। गुफिलः मित्रके अधियामो हैं, ऐमा मालूम होता है। यन्द्रोंमें प्रायः सदनाधिक प्रकारके याद्ययन्त देखे पुत्तली बग नेका कार्य भी पहुन नढा बढ़ा था । जाते हैं। इस समय उन सीके नाम और व्यवहार नोलनदफी बाढ़से बननेके लिये और भूमिको सीमा | मालूम नहीं होते। इससे मालूम होता है, कि उस समय निर्धारित करनेके लिये त्रिकोणमितिके अनुसार सङ्गीतशास्त्रको पूर्ण उन्नति हो चुकी थी। और तो भूमि नापी जाती थी। किस कौशलसे बड़े बड़े क्या, केवल एक तारयन्त ही इतने अधिक थे, जिसका शिलाग्यण्ड नीचेसे बहुत ऊंचे पहुंचाये गये थे, उस निर्णय करना कठिन था। नृत्यकला भी पूर्णरूपसे प्रणाली और कौशल को देख कर इस समय इजीनियर विकसित हो चुकी थी। तन्त्रो यन्त्रोंमें मतस्यरा दांतों तले उंगली दवाते हैं। फिर मित्रमें लौह यादि (Heptachord ), पञ्चस्वरा, वितन्त्री, एकतारा, योणा, धातोके हथियार उस समय तक प्रचलित नहीं थे। मजाहला. एसराज, सितार, सानपूरा तम्घर ( Tam. इसके अभाव भी मिस्रयासियोंने किस तरह देवमूर्ति lbourines ) आदि १०० प्रकारके यन्त्र थे। वेणु वंशो निर्माण और घास्तुशिल्पमें किस तरह ऐसी गद्दीयसी ( Flute ) आदि असंख्य प्रकारफे घाद्ययन्त्र थे। ढोलक. कीति प्राप्त की थी, उसको चिन्ता करनेसे आज फलको ! मृदङ्ग, पखायज, पर्णय, मानय, गोमुखी, मीरा, मेरी सुसभ्य जातियां प्रहेलिका समझेगी। आदि सहर तरहके यन्त्र शिलास्तम्भमें खुदे हुए हैं। ___ रसायन और चिकित्साशास्त्रको सम्पूर्ण उन्नति हो कई बड़े बड़े घाजोंके चित्र दिखाई देते हैं। उससे चुकी थी। भैपमिश्रित लेपोंसे लेप कर मृतदेह गवि किस तरदकी चायध्यनि निकलती थी, उसका निरूपण धरा भाव में यहुत दिनों तक रपी जा सकती थी. जैसे करना कठिन है। युद्धके समय बड़े पड़े कोंको बेताने महाराज दशरथको लाश रखो गई थी। मनः। आवाज निकल कर गगनमण्डलको विदीर्ण करती थी। चिकित्साका नैपुण्य प्राचीन कालसे ही साधारणको उत्सवोंमें नृत्यनिपुण विम्वाधरा नर्तकियों की नृत्य. मालूम था। किस कोगलसे मिस्नयामी पोतलफे घने लोला नाना ऐक्यतानिक याजोंके साथ पूर्ण होती भनसे इस्पातको अपेक्षा अधिक सुदक्षतासे काम करते थी। उस समयको रमणियां गोतवाधौ वटी निपुण थे, यह आज तक भी समझमें नहीं आया। होतो यो । गायक वीणा यम ले कर नाच-गान कररे ___ पालशिल्प ( Potters ) की अत्यधिक उन्नति हुई। थे। नर्तकियां किञ्चित लज्जा ढककर विविध हाय. थो। उत्तम कांचको कई सुन्दर वस्तुए' तय्यार की भायों को दिखाती और दर्शकमएडलीका वित्त माकर्पित जाती थी। पोर्सिलेन ( Porcelatin) पाका व्यय किया करती थीं। छार अधिक दिगाई देता है। आज भी पर्वतों पर खुदे यसभिलपमें भी मिन इम समयको अपेक्षा आगे बढ़ा, हुए तरह तरहफे पान दिग्नाई देते हैं। कांचके यने हुआ था। धनी मानी पिलासी लोग सूक्ष्म या धारीक बोतल, जाप करनेकी माला, नाना तरदफे नल भादि घखों से यक्षाच्छादन करते थे। नतंकियां अर्द्धनाना: प्रचलित थे। पपः प्रणालियां भी फांचको बनतो पो। यस्थामें ही हाय भाय दिपाया करती थी। यत्रकी अपेक्षा स्नानागारमें कांचको नलियों द्वारा जल लाया जाता: मलटारको अधिकता दिखाई देती थी। रानियां महा. था। स्फरिकका प्रचार मी फम न था। शनियां अच्छे आभूपोंने अपना टङ्कार किया करतो यन्तशिल्पको नो अत्यधिक उन्नति हो चुकी थी। थी। उनके गले में स्वर्णकुठार राजलक्ष्मीफे चिस्यरूप