पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७०४

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पीन तर उपपदीयत्वं दत्यश्च निपात्यने । शिय, महा . मीनाटनका साधारणतः ऐसा ही फल जानना दय । २ यप्तिा , यक। चाहिये। यदि इस लग्नमें रवि आदि कोई प्रहरहे, तो मौन (सं०१०) मोयते इति मीन हिसायां (फेनमानी। उनके स्थितिजनित विभिग्नरूप फल हुआ करते हैं। उण 1 ) इति नर निपातितश्च । १ मत्स्य, मछली।। इस मीन राशिमें रवि आदि ग्रहों की स्थिति के लिमे मत्स्प दंग्या । २ मेप आदि राशियोस अन्तिम या दारहवीं नीचे लिखे फल होते हैं। राशिः इस गाजम पूर्वभाद्रपद नक्षत्रका अन्तिम पद मीनमें रविफे रहने से अनेक मिलवाला, शोक भोर और उत्तर भारद तथा रेवती नक्षत्र है। इस राशिकी। सन्तापको सहा करनेवाला, प्राश, अनेक शत्याला, . अपिताजी इंगियां दो मछलियां है। इसका पर्याय | यशस्यो, मुक्तादि द्वारा धनवान्, सुन्दर, मिध्यायादो, ' और मंझाई अन्त्यम, पोट, अलज, सौम्य, भङ्गन, युग्म, तेजम्यो, गुघरोगारी गौर अनेक भाईघाला होता है। सम, द्वात्मक, गक्ष्य, उत्तर दिङ नाथ, गुरुक्षेत्र, दिनात्मक यदि चन्द्रादि ग्रह इस राशिको खते हों, तो यिमिन ( ज्योतिस्तत्त्व ) यह गशि चरण रहित, फफ-प्रकृति, जन्ट फल हुभा करता है। जैसे-मोनाशिस्थित रयि यदि पारो निशिष्ठ, पिङ्गल वर्ण, स्निग्ध, यात संन्तानवाली चन्द्रमासे देखे जाते हो, तो वाक्पटु, धनवान, युनियान् । और वाणयकी मानी गई है। इस राशिमें जो जन्म और पुनयुक्ता, राजाफे सदृश, शोकदीन और सुन्दर शरीर लेना पद क्रोधी, नेज नलनेगाला, भायित्र गोर अनेक याला होता है। मोनस्थ रवि यदि मङ्गलसे दिलाई देना विवाह करनेवाला होता है। । जाना हो, दो जातबालक संप्राममें विजयी, स्पटभाषी, कोटोप्रदोपके मनसे यह जलराशि है। इसमें जो धैर्यशील, सुग्यो और तीक्ष्ण होता है। मीनस्थ रवि शुधमे जन्म लेता यह सलिलोत्पन्न, मौक्तिकादि मुकमोना, : दिवाई देने पर मधुरभाषी, लिपिवेत्ता. फाध्यकलायित, मेशुनप्रसक्त, समान मनिविशिष्ट, स्वल्पकाय, शव का गोप्टोपाद और धानुश होता है । वृहस्पतिसे दिपाई देने पर यमनकारी, स्त्रीजित लावण्ययुक्त, अतिशय धनलोभी और राजभवन-वितरणकारो या राजा, हायो घो? और धन. परिडत होता है। (फोटो) युक्त नया युद्धिमान होता है। शुक्रसे देखे जाने पर सुगन्धि ३ लग्नभेद, मेप भादि वारद लामिसे अन्तिम लग्न।। माल्यादिके साथ सर्वदा दिव्य सोमोगरम और शान्त भयौनांशशोधित फलकत्ते आदि स्थानोंफा लग्नमान, नया शनिमे देखे जाने पर शुचि, परान्नाकाक्षी, 189IBEle है। इस लग्नमें जिसका जन्म होता है, नोनानुरत, चतुष्पद मोडनशील और गतिशय चपल . यह कार्यदन, अल्पमोजी, अल्पनीसंग, सुवर्णादि रख- होता है। युक्त, चञ्चल, नाना पागपिन्यासमें गति धूर्त, प्रियान- मोन राशिम चन्द्रमाके गहनेसे शिल्पकुशल, अभि. हितकारी, तेजस्यो, पलयान, विज्ञान, धनयान्. छेदन, चाग्येत्ता, भाग्येत्ता. विवेचक, कमनीय देव, गीता, कपिरत, चर्मरोगो, यिन्तमुख, पोतिशाली, विश्वासी, धार्मिक अनेक स्त्रीयाला, मधुरभाषी, भूपसेयी, कुछ असहनीय, यिनावशाली, बहुकुटुभ्ययुचा, सौभाग्यशाली मोधो, महात्मा, मुनी, धनवान, खोजित, नीमायापर, धीर माहयुक, सर्पदंशन, अग्निदाह, रक्त-पतन भार पानारत और दानशील होता है। विषप्रयेश इत्यादि द्वारा पीड़िताङ्ग, धूल औठ, क्षुद मौन राशिस्थित चन्द्रमा यदि रगिसे देखे जाते हो, गा, उप नासिक, कफयानप्रति, महात्मा, पहुचेष्टायुक्त, तो अतिशय कामुक, मुमो, योनिशोल, सेनापति, धनी फाप्यमानसम्पन्न, हाजन और स्त्रीपजिन, धार्मिक पित्त गौर सुन्दर रोयाला होता है। माम विवाद देने पर रोगी, नोचानार और शोभनोगार्यायुक्तः, कर और दाग : पगमून, प्राणी, पानी और शर होता है। युधसे नवगुन होता है। गलममजान शक्ति की मूतन्त्राटि दिमाई देने पर पुपए, गजा, मनीय सुमी और भनेर गेग, गुराग, मारणादि विधि प्रयोग, उपयास और बीघालाः दम्पतिम दिला देने पर कोमल, कानि 'मार्गदोप आदिसे मृत्यु होती है। विगिट, गुणग्रामविभूपिन, मएलाध्यक्ष, अमात्ययुग और