पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/७३९

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पीपांसित-पोरकासिम ६१ चन्द्रिका, न्यायतन्त्र, न्यायभूपण, न्यायमार्तण्ड, न्याय ' सिंह, कनाइया और अमर सिंह नामक सरदार उसके मालावार्तिकसंग्रह, न्यायरत्न, (मीमांसासूत टोका) : हाथसे बच गये थे। इसके बाद उन सोंने रामरोगोके न्यायसंग्रह, पुरुषकारमीमांसा, पूर्वमीमांसाकारिका, : मट्टोके दुर्गमे आ कर माथय लिया । मोर अजीजने प्रतिमाविलास, प्रयोगविधि, फलवतो, (मोमांसा सूत्र- रामरौनी में घेरा डाल फर सिखका दमन करना चाहा, टोका ) भाट्टशब्दपरिच्छेद, भादृशम्देन्दुशेखर, भाट्ट किन्तु सिखसेनाके बार बार अक्रमणसे उसका मनोरथ संग्रह, भाट्टोत्पाटन भावनाविचार, मीमांसाकौमुदी, सिद्ध होने न पाया। मीमांसाजीवरक्षा, मीमांमाधिकरणन्याय विचारोपन्यास, 'मीरअर्ज (फा० पु०) यह कर्मचारो जो यादशाहोंको सेवामे ' मीमांसाधिकरणमाला टीका, मीमांमानयविवेकार्थ- लोगोंके निवेदनपत्र आदि उपस्थित करे। मालिका, मीमांसान्यायपरिमलोल्लास, मीमांसापरि- मीर अली-एक विख्यात मुसलमान दार्शनिक। इनकी भाषा, मीमांसापादाय निर्णय, विधिरनमाला, विधि । विद्यासे प्रसन्न हो पारस्यक ७वें राजा शाह अम्बामने सुधाकर। अपनी प्रियतमा बहिनका इनके साथ विवाह कर दिया । मीमांसिस (स' लि० } विचार पूर्वक स्थिरीक्त, जो, इनके दार्शनिक अभिमतने प्रतीच्य जगत्में अचा स्थान विचारपूर्वक स्थिर किया जा चुका हो। प्राप्त किया है। इनके प्रसिद्ध छात्र सदरीको लिखी हुई मीमांस्य (स' त्रि०) १ मीमांसाके योग्य । २ जिसकी प्रन्थावली पढ़ कर यूरोपीयगणने एक चापयसे कार मोमांसा करनी हो। किया है, कि वे विज्ञान विषयमें आरिटटलमें भी उच्चा. मोर (सं० पु०) मिन्यन्ति प्रक्षिपन्ति नद्यो जलान्यवेति मन पाने के योग्य हैं। मि कन् ( शुसिचिमिनादीर्घश्च । उण २२५ ) नतो दोर्घः मोर आतिश ( फा० पु० ) वह कर्मचारी जिसकी अधी- त्यञ्च। १ समुद्र । २ पर्वतका एक भाग। 3 सीमा, नतामें तोपखाना हो। हद । ४ जल, पानी। मार आदिल खां फरुखी--खान्दशके फर्य खो-राजवंश- मीर (फा० पु०) १ प्रधान, नेता। २ धार्मिक आचार्य का तीसरा राजा। १४३७ ई० में पिता मालिक वाशिर ३ सैयद जातिको उपाधि । ५किसो बड़े सरदार या खोके मरने पर यह सिंहासन पर बैठा। १४४० ई०में रईसका पुत्र । ४ नाश या गंजीफेमेंका सबसे बड़ा इसने अपने राज्यमे दाक्षिणात्यवासी हिन्दुओंको मार पता। ६किसी काममें लगे हुए कई आदमियोंमेंसे वह भगाया। २४४१ ई०के अनिल मासमें घुहानपुर नगर जो सबसे पहले काम पर ले। ७ यह जो खेलमें औरों गुमशन द्वारा इसकी मृत्यु हुई थी । तादनेरमें जहां से पहले जीत कर या अपना दांव खेल कर अलग हो इसके पिताको कत्र थी उसके पास ही मकबरा बनाया गया हो। गया। मोर मजोज धक्सी-एक मुसलमान सेनापति । इसने मोर आलम-हैदरावाद निजामका प्रधान मन्त्री। इस. लाहोरके महाराष्ट्रीय शासगकर्ता अदिनावेग खाँका सेना का असल नाम मीर आबुल कामिम था। इसने प्रायः पति धन कर घुड़सवारोंको साथ ले दुद्ध शिस्त्रजातिकं ३० वप तक दाक्षिणात्यका शासन किया था। विरुद्ध चढ़ाई को थी। मांझा नामक स्थान सिखोंने ' मीरकासिम-बङ्गालके अन्तिम सूर्यदार और नयाय । हार खा कर जङ्गलमें आश्रय लिया। किन्तु यहां भी उन्हें इनका मसल नाम या कामिम अली खां, मीर इनको अजीजके हाथसे ताण नहीं। अजीजने जङ्गलको येर वंशोपाधि थी। सेनापति मार जाफरके जमाईको हैसि. लिया और उन छिपे हुए सिखोंका जङ्गली पशुको तरह यतसे इन्हें बङ्गालफे नवावकै यहां अच्छी नौकरी मिलो। 'शिकार किया। केवल रामगड़िया मिसलके सरदार नोधा सिराजुद्दोलाके अधःपतनके वाद मीरजाफर बङ्गालके सिंह और उसके अधिनायकगण, यशसिंह, मलसिह, ' मवाय हुए थे। इसके बाद मोर जाफरको ततसे उतार • और तारासिंह नामक तीन भाई तथा कोगड़ायासी जय अगरेज-कम्पनीने उनके सुदक्ष और साहसी जमाई मोर Vol, XVII. 166