पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८०२

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मुक्ता जिस मुफ्ताको उत्तम रत्न समझता है यह सीपका एक । निकाली जाती है उसके पास भारिपुर नामका एक . प्रकारका रोग है। अनेक कारणोंसे सीपके पेटमें दाह गांव हैं। यहां उनम्यान नारकं एक साह्य तालाब उठता है। सीप पहले उसे जलसे शान्त करना चाहता खुदवा कर मुक्ता उपजाता था । : उसने तालाबके है। जब उससे फाम नहीं चलता तयं उस श्वेत समुद्रफे खारे जलसे भर १२००० बच्चे सीपोंको छोड़ रससे दाहस्थानको ठंढ़ा करनेकी चेष्टा करता है। यही दिया था, किन्तु उनमें बहुतेरे मर गये। इङ्गलैण्ड और रस क्रमशः गाढा हो कर गोलाकार हो जाता है । फ्रान्सके अनेक स्थानों में समुद्रके निफट मुक्ताको खेती और कुछ समयके वाद मुक्ता बन जाता है। सोपके | होती है और उससे वटुतोंकी जीविका चलती है। दाहको उत्पत्तिके सम्बन्धमें अनेक मत है । वहुतोंका। अतएव ठाय यह निःसन्देह कहा जा सकता है, कि कहना है, कि सीपके कोमल मांस पर चोट लगनेसे दाह | सोपके पेट में किसी बाहरी चोजके चले जानेसे जो दाह उत्पन्न होता है, और इस बातकी परीक्षा भी कई बार हो उत्पन्न होता है उसीसे मुक्ताको उत्पत्ति होती हैं। चुकी है। मुक्ताव्यवसायी बहुतसे लोग बड़ी होशियारी- इसके अनेक प्रमाण भी मिले। फारस उपसागरसे एक से सोपके पेट में दाह उत्पन्न कर मुक्ता तैयार करते हैं। वार दो सीप निकाले गये थे। उनमेंसे एकके पेटमें एक पहले वे सीपोंको जलसे निकाल किसी बड़े तालावमें | मछली और दूसरेके पेट में एक केकड़ा था । मछली छोड़ देते हैं । पश्चात् उन्हें बाहर कर उनके पेटमें भालू | और के कड़े के चारों ओर नेकार' जम रहा था और भर कर फिर नालायमें छोड़ देते हैं। इन वालूकणों के मुफ्ता वन रही थी। इसी अवस्थामें ये सीप पकड़े गये चारों ओर 'नेकार' सञ्चित हो मुफ्ता उत्पन्न करता है। थे। कुछ लोगोंका कहना है कि स्वभावतः भी सीपके उद्भिविद्याविशारद लिनियस ने स्वीडेन देशमे | पेटमें दाह उठता है। . . . यह कार्य प्रारम्भ किया था और इसके लिये मुक्तास्थान । .. वहांके गवर्नर जेनरलसे उन्हें ७००० रु० पुरस्कार मिला | प्राचीनकालमें भारतवर्ष और फारस उपसागरकी मुक्ता था। चोनमें बहुतसे लोग तालाव, सीप पाल कर हो संसारमें प्रचलित थी। इंगलैंडके कवि मिल्टन- मुफ्ता उपजाते हैं । युनिया युइक्यिा नामक एक को भाषामें इसका उत्तम प्रमाण मौजूद है। वर्तमान प्रकारके सोपमें मुफ्ता होती है । जलसे उन्हें बाहर समयमें पृथिवीके दूसरे दूसरे स्थानों में भी मुक्ती पाई कर सोसेके छरें उनके पेटमें दे दिये जाते है और इन जाती है । अष्ट्रेलियाके उपकूलमें, सुलुद्रोपवत्ती सागरमें, छरों के चारों ओर 'नेकर' लिपट कर मुफ्ता हो जाता है। मध्य अमेरिकाके उपफूलमें तथा प्रशान्तमहासागरके दक्षिण कभी कभी चतुर मनुष्य बुद्धदेवको छोटी प्रतिमा बना| भागमें मुक्ता-शुषित पकड़ी जाती है। लंकाके दक्षिणमें कर सीपके पेटमें डाल देता है । जव मुफ्ता मण्डित तुतकुडिं वन्दर वर्तमान समयमें मुफ्ता शुफ्तिका प्रधान वह प्रतिमा बाहर निकलती है तब बुद्धरूपमें भगवान्फे | स्थान है। अमेरिकाके कालिफोर्निया और पनामा उप. अवतारकी यह घोषणा करता है। देश विदेशसे यात्री | सागरमें मुक्ता बहुतायतसे मिलती है। १८८२ ई०में . आ उस प्रतिमाकी पूजा करते हैं । इस प्रकार वह व्यक्ति कालिफोनिया उप-सांगरमे ७५ फेरेट. अर्थात् । १५० खूब कमा लेता है। पश्चात् वह अधिक दाम पर किसी रत्ती भरकी एक मुफ्ता पाई गई थी। द्वितीय फिलिप राजे महाराजेके हाय वेच डालता है। ये सब मुफ्ता ने १५७६ ई० में मार्गरिटा दीपसे । २५० कैरेट अर्थात् ' भी असली हैं, केवल इनकी उत्पत्ति प्रणालो कृत्रिम है। ५०० रत्तो वजनकी एक मुफ्ता पाई थो। ' आज कल उद्यमशील पाश्चात्य लोग रसायनशास्त्रकी सहा.! अष्ट्रेलियाफे उपकूलमें उत्कृष्ट मुफ्ता पाई जाती है। यंतासे होरफ आदि रोंको तैयार करनेकी चेष्टा करते . वहुत स्थानों में नदोके सोपोंमे भी मुफ्ता पाई जाती है। हैं। सामुद्रो अभिकुइलाकी मुफ्ता तैयार करनेमें उन्होंने अमेरिकाके युनाइटेड प्टेट, स्काटलैंड, आयरलैंड, साक्- विशेष श्रम किया था। लंकाके जिस स्थानमें मुफ्ता , सनी, वहेमिया, यभेरिया, लपलैंड, कनासा आदि राज्योंकी