पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८०३

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मुफ्ता नदियों में मुफ्ता पायी जाती है। चीनके अनेक स्थानों होता है। इस घ्यापार में आशातीत लाभ देश सरकारने की नदियों में मुक्ता पैदा होती है। बहुतसे कर्मचारो तथा नायोंका इन्तजाम किया है। ये यंगालकी जिन नदियों में मुक्ता पायी जाती है उसमें कर्मचारी लोग इसी स्थानमें रहते हैं परन्तु जिनको इछामती नदी ही विशेषरूपसे उल्लेखनीय है। अभी | प्रत्येक वर्ष आना पड़ता है ये लोग यांसका घर घना फर सरकारने मुफ्ता निकालना बंद कर दिया है। कुभोरसे | यहीं पर रहते हैं। . भरी इछामती मुफ्ताको खान है, यह किसीको मालूम सीप निकालने के एक दिन पूर्व ही नाविक लोग बड़े नहीं था, फेवल मछुआ लोग इस रहस्यको जानते थे। समारोहके साथ हांगर देवताको पूजा करते हैं। इस ., इसके अतिरिक्त दूसरे दूसरे स्थानोंकी नदियों और कार्य निर्विघ्न समाप्त होनेसे उनके मानन्दकी सीमा तालावों में छोटी छोटी मुफ्ता पायी जाती है। मुफ्ता नही रहती । परन्तु गोताखोरों के मनमें गनेक प्रकारको जलाई जाने पर सीपके चून जैसी चून हो जाती है। शंका बनी रहती हैं। - इस चूनेको उत्तेजना-शक्ति अत्यन्त वलवती होती है। दक्षिण भारतमें तुतकुड़ी यन्दर हो सीप निफालनेका बंगालके विलासी नवाप लोग मुफ्ताभस्मके चूने मुख्य स्थान है। सीप निकालनेमें इवनेवालेको भनेक पानमें खाते थे। पाश्चात्य विलासियोंने कई बार मुफ्ता विघ्न वधाओं का सामना करना पड़ाता है। पास कर मालाको जला कर उसके चूनेको मदिराके साथ पान हांगर तथा जेली नामक मछलीफे उपद्रयका अधिक भय • किया है, इसके अनेक दृष्टान्त पाये गये है। रहता है। इसके आलावा अन्यान्य जलचरोंसे भी सीपनिकालने की विधि विपद्की शंका रहती है। सीप निकालनेके लिये देश ऐशके व्यापारी लोग अपने पहले ही कहा जा चुका है कि समुद्र-गमस्थ मुश्ता अपने अधीन अनेक गोताखोर रहते है। पाश्चात्य सरकारी सम्पत्ति है। इच्छानुसार लोग सीप नहीं भाषामें इस व्यापारको Pearl fishing कहते हैं। किस | निकाल सकते। वर्ष में फेवल दो महीने तक ही इसका प्रकार सीप समुद्रमसे बाहर निकाला जाता है तथा ध्यापार होता है । काारम्भके पहले ही सरकार किस प्रकार मुफ्ता उसके भीतरसे बाहर कर सभ्य तथा उसके भीतरसे बाहर कर सभ्य तथा इसकी घोषणा करती है। इसी समय तूनफुडी एक शौकोन-समाजम विलाससामग्री रूपमें प्राय विक्रय होती बड़ी नगरी सो हो जाती है। सरकारी कर्मचारोवर्ग, है, उसका विवरण संक्षेपमें नीचे दिया गया है। पुलिस, डाकृर, मलाद, मुफ्ता ठेकेदार, व्यापारी, गोदो भारतवर्ष में केवल लङ्कादापके निकटस्थ सागरमें मुफ्ता इत्यादिसे स्थान परिपूर्ण हो जाता है। कार्यारम्भको , सीप पाया जाता है । इसके अलावा पशिया द्वीपके पार- एक दिन पहले होसे बनेवाले, मलाह इत्यादि प्रस्तुत 'स्योपसागर, लालसमुद्र, सुल्लू तथा पापुभा द्वीपके समी- रहते हैं। पहले हगिरदेवको पूजा होती है। हांगरदेवक पस्थ समुद्रमें भी सीप पाया जाता है। अमेरिका महा- पुजारी एक ईसाई सजन है:। इनका जीवन निर्वाह दोपके प्रशान्त तथा अरलाण्टिक महासागरमें विशेष | हांगरदेवी पूनार्म प्राप्त आयसे ही होता है। फर कैलिफोरनिया न्युजरसो तथा पनामाके उपसागरमें जिस दिन सोप निकालनेका काम भारम्भ होता याहुतायतसे सोप पाया जाता है। लगभग तीन लाख है उस दिन प्रातःकालमें तोप छोड़ी जाती है। शार • मन सीप प्रति वर्ष बाहर निकाला जाता है। इनमें | होते ही यह स्थान कोलाहल-पूर्ण हो जाता है। इसके • दशांशमें mi सता मिटती हैं और शेषमें कछ भी नही। बाद नाव समुदमें डाली जाती है। तोरसे लड़ाके निकटस्थ जहाँ सीप पाया जाता है यहां घर्ष में ६ मील दूरमें सीप निकाला जाता है। जिस · दश महीने तक कोई नहीं रहता। वैशासा तथा ज्येष्ठ स्थान पर गोतामोर दृवते हैं उस स्थानको पहले धीमे महीने में विदेशी व्यापारी लोग यहां आ कर रहते हैं। किसो वस्तु द्वारा निश्चित कर दिया जाता है। - मुक्ताका व्यापार सरकारी कर्मचारीको देख-रेवमें! इस सीमा याद्दर कोई नहीं देव माना! कोम Fol. XTIL. 179