पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८२४

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७३६. मुगल इस तरहको दुर्गतिक याद तमुरवि घोड़े पर सवार । आश्रय-दाताके अनेक उपकार किये तथा उसकी तरफसे होषपनी मांके पास पहुंचा। उसकी माता और स्त्रियों ' अनेक युद्धोंमें जयलाभ कर उसको राज्यसोमा । (जो उसे मरा जान निश्चिन्त हो गई थी) के गानन्दको बढ़ाई। ... सीमा न रही। उमका छोटा लड़का तुली भी पिताके आठ वर्ष इस प्रकार तमुरचिको सुमसे दिन विताते आने पर आनन्दके मारे नाचने लगा था। इस गानन्द देख भायंग खांके. मन्त्री और पड़ोसी जाटने लगे। के दिन तमुरवि काले घोड़े पर सवार था, इसीलिये विपक्षियोंके पड़यन्त्रसं तमुरनि थोड़े ही दिनों में अब भो मुगल लोग इस तरहफे घोड़े का अधिक आदर आवंग खांके लड़के संगूनको कड़ी दष्टि पर पड़ गया। । लड़केकी चार यार उत्तेजनासे आवंग खां अपने आधित- तमुरवि अपने देशको लोट अपना राज्य बढ़ानेकी के नाशमैं सहमत हुआ। पड़यन्त चलने लगा और इच्छासे युद्धोम उठा । इस समय उसने जाजराट, नैरुण, तमुरचि विपत्तिको पास आई . जान । कराचार जामुका, माजान् ( जजान् ) तान जिउत्, फुङ्काराट, नु यानके साथ भागनेकी सलाह करने लगा। तदनुसार जलाार, दूरमान, योथो, सूजो और पलीस नामक शत्रु-: उन्होंने अपने अपने लड़के वालोको फलाचीन पर्वतके पक्षीय मुगलों को अपने अधीन कर लिया। केवल वर्लस पास थाल्जुना बुलाक नामफ. स्थानमें भेज दिया और चंगके अगुर कारावार लोग पहले होसे उसके साथ आप दोपहर रातको अपने अनुचरोंके साथ भाग सन्धि सूत्र में बंधे थे । गये। आवंग खांको सेनाने उन लोगोंका पोछा किया यिनित विपक्ष उसको समूल नाश करनेके लिये लेकिन युद्ध में हार खा कर उसकी सेनाको लौटना पड़ा। पड्यन्त्र रच १९९३ ई० में एक स्थानमें इ हुए । तमु- इस युद्धमें सगुनका मुंह शत्रुके तोरसे विद्ध हो गया रुचि उन्हें संख्या अधिक तथा प्रवल देख रोकनेके लिये और कितने रायत् सैनिकाने प्राण त्याग किये। भागे न बढा, वरन् उसने अपने पिताके मिल भावंग खांके तमुरचि अपने देशको लौटा। इस समय उसकी शरण लेने की इच्छासे उसके देशकी ओर चल पड़ा। - अवस्था ४६ वर्षकी थी। उसके पुरे दिनों में जो सब कराचारका सरदार भी उसके साथ हो लिया। नेरुण मुग़ल उसका साथ छोड़ इधर उधर भाग गये शवंग ख। दुरल्गीन् मुगलवंशकी करायत् शाखा... थे, वे सभी धीरे धीरे उसके दल में मिल गये। इस का स्यामी था। फरायत् लेाग संख्या में अधिक तथा समय और कितनी ही मुग़ल शाखाओंने उसको अधीनता तुफैजानिमें सर्व प्रधान थे। सम्मान्त और ऐश्वर्यवान् । स्वीकार कर ली थी। , . बादशाह णिता-प-राज पालतान खांके साथ भाग इस प्रकार पफ यड़ी सेना वही कर शनिशाली हो खांको मित्रता रहने के कारण दोनोंकी राजशक्ति सुदृढ तमुरचिने वादशाह आवंगफै यियद्ध युद-घोषणा कर दी। हो गई थी। आवंग मां तुघल तुगीन भी कहलाता था। युद्ध में पराजित हो आयंग.ने. शव भोंके हाथ रानी तमुरचि अपने अनुचरोंके साथ करायतोंके राजाफे तथा लड़कियों को समर्पण कर मात्मरक्षा की। मागके पास पहुंचा। राजाने उसे बड़े गादरके साथ रफ्ना ।। भाईने अपनी तीन लड़कियों को, तमुरचिके. हाप सौंप यहां दिनों-दिन उसको अवस्था सुधरने लगो। भाग छुटकारा पाया। आवंग था जैसे प्रवल पराक्रमी वाद. रां प्रत्येक काममें उससे सलाह लिया करता था। शाहको हराने पर तमुरचिका : यश चारों ओर फैल फर्मशः तमुरचि उसका.ऐसा प्रोति-पात्र हो गया कि गया।..उसको शकिको देख और मी कितनी ही मुग़ल मायंग उसको स्नेहयश पुत्र कहा करता था। उसने शाखापें उसके अधीन हो गई । इस समय तमुरचिने तमुरचिफो उच्च पद पर नियुक्त कर अपनी उदारता दिए। सामान्कोमा नामक स्थानमें खांकी उपाधि प्रहण की लाई थी। इस प्रकार प्रायः ८ वर्ष तक नमुरचिो सनाटके । (५६ हिजगे)। मधीन अपना समय बिताया। इसी बीच में उसने अपने ; .. इमफे बाद उसने भास-पासके तुको तातारों और