पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८४

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७५ ., : । महेम्पद अनसर-महम्मद अली खा इलाहाबाद (प्रयाग ) में रहने लगे। यहां पारसी तथा । नौकरी करने लगा। विचक्षण तथा सूटबुद्धि देख अरवी माया लड़कोंको शिक्षा देनेके लिये इन्होंने एक फर सम्राटने इसे अपना प्रधान परामर्शदाता बनाया। पाठशाला खोली। इनको बनायी हुई अनेक पुस्तकें पोछे सैयद गुसैन भलो गांको मृत्यु और अपने गा. मिलती है।यितासनिके लिये इन्हें अफजलको सैयद भवदुल्ला सांके फारारोघरो बाद सबाटने इन्हें । उपाधि मिली थी। १६२८ ई० ये परलोकयामो हुए। यजौरका पद दिया और इतिमद् उद्दौला इनको पदको महम्मद अनसर-एक मुसलमान जीवनी लेखक । इन्होंने | रहो। किन्तु दूसरे हो साल ये रोगप्रस्त हो करालकाल. १४४५१०में गुजरात विण्यात सुफी शेख अहमद पट्टर के शिकार बने। . को जीवनीफे आधार पर 'मलफूजात शेत अहमद महम्मद अमीन राजो-फ्त मा ठम नाम जीयनी कोप. यमाधि' नामक ग्रन्थ लिखा। आज भी गुजरातमें उक्त , के रचयिता। सम्राट मायरको अमलदारोम १५६४ ई० में सुफो साधकका मकयरा मौजूद है। ग्रन्धकी रचना शेष हुई । म प्राय यह नातिगीतोष्ण महम्मद अमोन- अहमदनगरके एक मुसलमान ऐति- मण्डलस्य सात ऋतुओंका वर्णन, प्रधान प्रधान नगरी• . हामिक, दौलत महम्मद अल हुसैनी अल थालगोके : का विवरण तथा तत्कालीन प्रतिभाशाली पतियों पुल । इन्होंने नयाय सिपाहवार ग्यांके आश्रयमें 'मानफा, और कवियोंकी जियनी लिख गपे हैं। . उल् भययार' नामक एक इतिहास लिहा। १०३६ · महम्मद समोर वां--'मैलद नादरी' नामक उई धके । हिजरोमें अन्य समाप्त होने के कारण ही इन्होंने अपने प्रणेता। आग इनका जन्म हुआ था। अनुल कादिर 'अन्धका यह नाम रखा। ग्रन्धके शेषो नयावकी यहुत गिलानी नामक एक मुसलमान साधुको जोयनीफे भधार तारीफ की गई है। पर १८४७६० इन्होने उक्त प्राय समान किया। महम्मद अमोन -एक मुसलमान कथि। सम्राट् पालम : महम्मद भला उदोन विन शेम भलो माल दिस्काफो~ . गौरफो युद्धविजय और दक्षिणप्रदेशके सौन्दर्य पर जो' फनवापुर अस मुफ्तार नागफ मानि-मन्यफेरनायिता। कविताए इन्होंने लिखी थी, उन्हों को संग्रह कर 'गसः । यद तन्योर-उमाशयमार' नामक प्रगी रोका रार उल मयानी' नामसे प्रकाश किया। नगरों के वर्णन है। इसके सिया दमों और भी पित्तने हो मुकदमा में ये मुगल अधिकारफे पहलेका सौन्दर्य हो वर्णन फरहाल लिया हुआ है। . .. . गये हैं। अतपय इस प्रत्यको 'भारतीय उद्यानका प्राचीन महम्मर भन्दी ---(मनसा) नागे. मुजफरी और सौन्दर्य' कहना अनुपयुक्त न होगा। क्योंकि, मुगलों के | पदम्ल मपाल नामक शिक्षामफे प्रणेता । पद हाजीपुर अत्याचारसे यदुतो नगर मलियामेट हो गये थे। इसके तथा तिरगतको कौजदारी अदालत दारोगा। सिया 'हकीपत इला लादा नामफ एक भौर धर्मात्य, महम्मद गली मां--पक रोहिला सरदार । रायपुर के रोहिला अन्य इनको बनाई हुई मिलती है। । सरदार कोश उला प्रकाशमा १५४९. महम्मद भगीन 61--एक मुगल सेनापति, महम्मद सैपद , में अपनी पितृमणसि nिd दुया! परन्तु मीरजुमलाका लड़का । यद सम्राट शाहला तथा: थोड़े ही समय इसके भाई गुलाम महम्मद रहकर मालमगीर मधीन पांच हजारी सेनामो का सेनापति कर गुममायमे मार डाला 1 में मामाने रामा था। गुजरातप्रदेश मापदायादमे १६८२९०को इसकी नाबालिग पुन भमद का पक्ष ले, गुलाम गदगदको मुत्यु । विटरमें कैद किया मौर कलना भेज दिया ! १८१०९०. महम्मद ममीन खा-एक मुगल-सयिय, निमाम उन्मूलक पे महा-याता महान क्षण टीपू सुनाम मिल भासफजाका मा मीर बहा उदोनका लहा। मप्राद : भीर यहांसे कापुनको भाग गईं। पदो समान मादकी भौरजेवफे गमत्यमालमे पद गपनी जम्मभूमिका परि सदापताप इग्दोंने माग्न पाई का हो गया स्थाग पर भारतवर्ष मायरा भीर धारा, अधीन को । माद मनोसाको मायुफ बाद मेर