पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८५०

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मुजफ्फरपुर-मुजफ्फरशाह नेपा और वागमतोके बीच है। इसके भी अधिकांश , लतके पास गंडकका पहलेका एक गई हो एक सुन्दर । भागमें धान और शेष भागमें दूसरी दूसरी फसल झोल हो गया है। नदी के किनारे किनारे एक बांध धनवा दिया गया है। १८७१ को बाढ़से शहरको बड़ी कई बड़ी बड़ी नदियां इस जिलेमें वहती है। उनमें / हानि हुई थी। शहरके चोचमें राम और सीताजीके दो गङ्गा, वागमती, यूढी गएडक, लखनदाई और वार विशाल मन्दिर हैं। इनके अतिरिक कई शिव मन्दिर प्रधान है। इन नदियों के कारण यहां कृषि तथा व्यापारमें | भो देखने आते है। बड़ी सुविधा हुई है। मुजफ्फरशाद (१म)---गुजरातके प्रथम मुसलमान राजा! . इस जिलेके मुख्य शहर हाजीपुर, लालगञ्ज, सोता. इनका असल नाम जाफर खां था । इनके पिता वाजी- मदी आदि स्थान उल्लेखनीय हैं। यहांको उपजमें उल-मुल्क टौको (त्यागो) श्रेणोंके क्षत्रिय थे। जिस समय . सोरा, नील, तम्बाकू और अफीम प्रधान हैं। वह हिन्दू धे उनका नाम साधारण था।साधारणके भाई विपन० डबल्यू रेलवे इस जिले हो कर गई है। साधुने दिल्लीश्वर सलतान HERE दिन लंक आt मुजफ्फरपुरसे सीतामढ़ो और हाजीपुर तक दूसरो सुलतान अबुल मुजफ्फर फिरोजशाहको अपनी बहन लाइन दौड़ी है। मुजफ्फरपुर, लालगञ्ज, सीतामढ़ी और व्याह दी थी। उनके बाद के समारोंकी कृपांसें इस वंश.. मोहनगर आदि कई स्थानों में म्युनिसपलिटो और दातव्य की बड़ो उन्नति हुई थी। चिकित्सालय हैं। १३४२ में दिलो नगरमें मुजफ्फरका जन्म इस जिले १७६च वर्षा होती है। गएडफ आदि हुआ था। दिल्लीराजफे एक साधारण कर्मचारी होते नदियों के कारण बाढ़ अक्सर आया करती है। भया- हुए भी वे अपने असाधारण प्रतिभा-पलसे अपने वंश- नक बाढ़ के कारण यहांके लोग कई बार बड़े क्षतिग्रस्त गौरवको बढ़ाने में समर्थ हुए थे। गुजरात राजा । हुए हैं। १९०६ ई०को बाद सबसे बड़ी भयानक थी। फर्युत-उल-मुल्कफे राजद्रोही धन जानेके कारण मुज. उस वाढने करीव १००० गांवको तहस नहस कर दिया। फ्फरशाहने उसे रणक्षेत्रमें पराजित कर मार डाला। था, लोगोंकी जो क्षति हुई थी यह मकथनीय है। भाज; उनकी सफलता पर पुरस्कार स्वरूप दिलोवर द्वितीय फल बांधका प्रबन्ध हो गया है। सुलतान महम्मद शाह तुगलकने उनको १३६१ ई० में गुज- २ उक्त जिलेका उपविभाग या सब-डिविजन । .इस रातको शासनकर्ता नियुक्त किया। .. ... .... का रकबा १२२१ वर्गमोल है। ___ इसके पांच वर्ष बाद १३९६ ई० में, मुजफफर खान ३ जिलेका प्रधाननगर। यह गएडक नदोके दाहिने मुजफ्फर शाह नामसे अपनेको गुजरातका स्वाधीन किनारे सक्षा २६७ उ० और देशा० ८५°२४ पूरबके / राजा कह कर धोपित किया तथा अपने नामसे सिमा मध्य अवस्थित है। रफया २५६० एकाई होगा। .चलाया ..! .इतिहासमें यह 'मुजपकर शाही', सिका शहर देखने में सुन्दर है। आज कल तिरसुत सिवि. नामसे विख्यात है। वीस वर्ष तक राज्य करनेके बाद जलके कमिश्नरका हेड'कादर यहीं है। यहां अदालत और ७१ वर्षकी अवस्था ये मर गपे । पीछे उनके पास सरकारी दातथ्य-विकत्सालय हैं। स्वर्गीय घावू लंगरसिंह। तथा तातार खाँफे पुत्र महम्मद शाह राजसिंहासन पर . का.यनवाया जि० यो० धी० कालेज़ है। यह फस्ट प्रेड बैठे। इसवंशके राजाओं के नाम निम्नलिखित हैं--- . ' कालेज है और इसमें घी, प, कास तक पढ़ाई होती है। मुजफ्फरशाह १म ! . . . . . . . . . . इसके अलावा एक संस्कृत कालेज और कई स्कूल / २ अहम्मदशाह । " भी हैं। . . , . .:, ३ महमदशाह मरोम . .. . ... गंडक नदी के द्वारा व्यापार खूब चलता है। मंदा-! ४ कुतुबशाह । . . . . . .