पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/९७

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पहम्मद गोरी (घोरो)

- भाईके राजा दोनेका संपाद.मुन. कर मुइन्जुद्दौन, यान भेज दिया। पीछे गयासुद्दीनने हीरट, परसिपा,

चचासे आशा ले फिरोजकसे रवाना हुए। गयासुद्दीनने ! कियार और वघलार मादि अनेक स्थानों पर अधिकार पहले इण्हें 'सर-जान्दार' अर्थात् प्रधान राजनिहयाइक- उमाया। इसो समय मुलान मला उदोन हुसैनको का पद दिया और पीछे इस्तिया सपा कजरान प्रदेशका | कन्याफे साथ गपासफा विवाद हुमा । अप महम्मद मासक पनाया. गयासने घोरमें अपनी राजधानी गोरी इनको नाकयो वाल हो गये। . . साई। भायुल भवास मादि कई संम्रान्त प्यनियोंने कुछ दिनों के बाद गज-जातिय ममोरोंने अपने सका घोर विरोध किया, पर गयासने अभ्यासका शिर कौशलसे गोरी सेनाको परास्त किया। पोडे महम्मद काट कर दो टुकड़े कर डाला। कहते हैं, कि उसी गोरी स्वय' दलदलफे साथ उतरे भीर ये भी परास्त समयसे गयासको समृद्धि और राजसीमा बढ़ने लगी। हुए। गया मुद्दीन यह समाचार पासे दो गज-जातिको गयासने अपने भाईको गरमशिरके सर्वप्रधान मोर ध्वंस करने में तैयार हो गये । ५६६ दिजरीमें इन्होंने समृयशाली निगिनाबाद नगरका मार सौंपा। . अपनी पिजय पताका फहराई। मालिक फखयद्दीन अपने भतीजेको समृद्धि पर जलमे गजनी पर अधिकार कर लेनेके बाद गयासुद्दीनने मह. लगे। अतः उन्होंने अपने को ही प्रत उत्तराधिकारी म्मदगोरोको यहाँका राजा बनाया। अब उनि अपना घोषित करना स्थिर किया । घोरफे अनेफ अमीरोंने इन्हें इस कार्यमें साप दिया। अब फसयहीनने अपने नाम 'सुल्तान-उल-माजम् मुइज-उद-दुनियां अचूल मुज. भतीजों के विरुद्ध युद्ध घोषणा कर दी। इसी मुभय- पर महम्मद' स्पा । जिरो ५१०में इन्दोंने संपूर्ण गानो सरमें मालिक ताजउद्दीन यलदूज् फिरोजक पर अधिकार प्रदेश तथा गरदेज पर अधिकार किया। दुमरे साल करने के लिये ससैन्य रयाना छुप । जरोफे क्षेतमें दोनों दल- फरामितके हाथ मल्तान छीन लिया भीर द्विजरी ५०४ में मुठभेद हुई। यलदुमने समझा था, कि 'घोर-सेनाओं- में भारत पर अधिकार करनेकी इच्छा प्रकट की। फो विध्वंस करनेको मुझमें पूरी शक्ति तो जरूर दे। फिरिस्तामें लिया है-गादयुहीन 'उथा' पर पर, जय विजय ईयराधीन है, अतः मैं कर दो फ्या अधिकार करने आये। उचाराजने दुर्गम भायय लिया। सफता ।' अकस्मात् एक घोरो पोरने पर ऐसा पत्र इस पर सुलतान दुर्ग के पास ही छायनी दाल फर दुर्ग चलाया, कि.नका शरीर संह पंड हो गया। यतपय जीतनेका उपाय दृढ़ने लगे। उन्होंने देखा कि सम्मप घोरी-राजको विजय पताका फहराई। समरस फललामकी संभावना नहीं है। इसी समय उन्हें दूसरे दिन घोरराज-शत्रु वालराफे शासनकर्ताका मालूम हुभा, कि राजा रानीके यशीभून हैं। गोरी राजने मुएट भी दो टुकड़े करके पापरायण चचाके पास रानीको कहला भेजा, भगर गनी नगर छोड़ कर वादर भेज दिया गया। फिपर-उद्दीन मागन को चेष्टा कर हो । घली माये तो मैं उनसे विवाद कर और उन्हें रहे थे, कि एकापक गयासुद्दीन भौर माग्नुहीनने ससैन्य विश्वको रानो पना। रानी, चादै भयसे हो पथमा उन्हें चारों.मोरसे घेर लिया। अब यो ये जालमें फंस गजनोपतिके विजप-यिभ्यामसे, इम.प्रम्नायशो सोकार गपे, माग कैसे सकते थे। दोनों भाइयोने शिविरमें ला| फर नगरसे चादर चली आई। दुटा रानीमे दो उपाराम. कर अत्यन्त मादरके साथ उन्हें सिंहासन पर बिठाया। का प्राणान्त टुमा। राम्प मुसलमानों के दाग हगा। भोर भानुगत्य प्रकारास्वरूप मेखला स्पर्श करके दोनों रानी और रामपुमारी इस्लामपर्ममें दीक्षित दुई। किन्तु भाई पास हीमें पढ़े हो गये। फागहीन लासे मर मादयुद्दीनने रानीसे रियाद नहीं किया। इसके लिये गये और उट कर बोले, "तुम लोग क्यों इस प्रकार मेरी रानीको बहुत दुःश हुमा धीर पोरे दो दिनों बाद दुर्गति करते हो।" किन्तु दोनों भाइयोंने यथोचित सम्मान हानी और राजकुमारी दोनों इस लोकमे मन कमी। पर उनका संदेश दूर किया मीर भादरपूर्वक यामि- मिनदाजने लिपा -मुन्नान और उपा. पर Vol.XII.23