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पोलैण्ड
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'३१ तक उपनिवेशो के मत्री। सन् १९२९ मे वह लार्ड बना दिये गये, किन्तु उनकी पत्नी ने 'लेडी' उपाधि धारण करने से इनकार कर दिया।

पोलिश कोरीडर--यह भूमि की एक पतली लम्बी पट्टी है जो पोलैण्ड को बाल्टिक सागर से मिलाती है। यह समुद्र-तट की ओर १० मील चौडी तथा पोलैण्ड की ओर ६० मील चौडी है। सन् १९१६ मे यह प्रदेश पोलैण्ड को दे दिया गया। यह पट्टी पूर्वीय जर्मन-राज्य के बीच मे होकर जाती है तथा जर्मनी को उसका पूर्वीय प्रदेश प्रशा से पृथक् कर देता है।

पोलैण्ड--क्षेत्रफल १,५०,००० वर्गमील, जनसंख्या, वर्त्तमान युद्ध से पूर्व, ३,४०,००,००० । रूस, प्रशा तथा आस्ट्रिया ने क्रमशः १७७२, १७९३ तथा १७९५ मे, इस देश को छिन्न-भिन्नकर, अपने-अपने राज्य मे मिला लिया। १२० वर्षो तक स्वाधीनता की प्राप्ति के लिए निरन्तर प्रयत्न करने के बाद, सन् १९१८ मे, विगत विश्वयुद्ध के परिणाम स्वरूप, पोल लोगो को स्वाधीनता मिली। रूस, प्रशा तथा जर्मनी के पोलिश-भाषी प्रदेशो को मिलाकर पोलिश स्वतंत्र राज्य बना। १ करोड १० लाख आबादी की अल्पसंख्यक अन्य जातियाँ भी इसमे शामिल कीगई। वर्त्तमान विश्वयुद्ध पोलैण्ड से आरम्भ हुआ। पोलैण्ड के कोरीडर, पोज़नन् प्रान्त तथा पूर्वी साइलोशिया मे जर्मन बहुसंख्या मे थे। जर्मनी की पोलैण्ड के साथ सन्धि थी। उसके अनुसार इन देशो की समस्त प्रजा की राय ली गई, जर्मनो का बहुमत निकला और जर्मनवासी प्रदेश जर्मनी के अधिकार मे रहा। जिन लोगो ने पोलैण्ड के पक्ष मे मत दिया उनका प्रदेश पोलैण्ड को मिल गया । सन् १९२० मे पोलैण्ड ने रूस के जिस क्षेत्र को ले लिया था उसमे यूक्रेनी और श्वेत रूसी आबाद थे। देश की इस प्रकार सीमा बढ़ जाने से पोलैण्ड के पडोसी राष्ट्रो ने आक्षेप शुरू किये, किन्तु पोलैण्ड फ्रान्स के भरोसे पर रहा आया।

इसके बाद पोलैण्ड मे आन्तरिक शान्ति नही रही। सामाजिक और आर्थिक झगडे उठते रहे। सन् १९२६ मे मार्शल पिल्सुड्स्की पोलैण्ड का शासक बन गया। इसके बाद यद्यपि पार्लमेन्ट और शासन-विधान नाममात्र को रहे, किन्तु वस्तुतः देश मे सैनिक अधिनायक-तंत्र का शासन रहा। देश के नेता जेलो मे डाल दिये गये या देश-बाहर कर दिये गये। सन् १९३४ मे पोलैण्ड ने--अगरचे