से अपना सम्बन्ध–विच्छेद कर लिया। बलग़ारिया की जनता रूस से सहानुभूति रखती है, किन्तु वहाँ की सरकार जर्मनी के साथ है।
बर्लिन-बग़दाद-राज्यरेखा—पिछली लड़ाई के पूर्व से ही जर्मनी बलकान–राष्ट्र–समूह और तुर्की में होकर बग़दादस्थित मोसल के तेल के कुओं तक अपना साम्राज्य स्थापित कर देने के सुख–स्वप्न देख रहा हें। वर्तमान युद्ध में भी वह इस काल्पनिक राज्यरेखा को नहीं भूला है। वह मनोरेखा एक रेलवे लाइन का रूप धारण करनेवाली थी। तुर्की और वग़दाद के बीच, इस लाइन का अन्तिम भाग, जुलाई '४० में, बन चुका है।
ब्रह्मा (बर्मा)—अप्रैल १९४२ में जापान द्वारा अपहरित होने से पूर्व बर्मा ब्रिटिश राष्ट्र-समूह का एक अंग था और सन् १९३५ से पूर्व भारत का एक प्रान्त। सन् १९३५ के नवीन वर्मा शासन-विधान द्वारा उसे भारत से पृथक् कर दिया गया। भारत में इस पृथक्करण का, राजनीतिक ओर आर्थिक आधार पर, विरोध किया गया। ब्रहमा का क्षेत्रफल २,६२,००० वर्गमील और जन-संख्या १,५०,००,००० है : इनमें नब्बे लाख ठेठ बर्मी; चौदह लाख कारेन और दस-दस लाख शान तथा भारतीय, आदि हैं। ब्रह्मी पूर्ण सभ्य हिन्द-मंगोली जाति के हैं ओर उनकी भाषा चीन-तिब्बती समूह की है। बर्मा दो भागों में विभाजित है : मुख्य बर्मा और शान-रियासते। ब्रिटिश गवर्नर जड़काले में रंगून में और गर्मियों में मेमियो में रहा करता था।
भारत से पृथक् करते समय ब्रिटिश सरकार ने, १९३५ के भारत-सरकार क़ानून के आधार पर, बर्मा ने क्रमिक राजनीतिक विकास और उसे स्वशासन