पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२३९

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भारत ३३३ कार्य को स्थगित करदिया। इस प्रकार संघ-विधान (फेडरेशन) का गर्भपात होगया। | ( ५ ) वैधानिक संकट-सितम्बर १९३९ मे जब ब्रिटेन ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध-घोषणा की तो भारत के गवर्नर-जनरल ने, भारतीय असेम्बली या देश के नेताओं की अनुमति लिये विना, यहाँ भी यह घोषणा करदी कि इस युद्ध में भारत ब्रिटेन के साथ लडाई में शामिल है। गाधीजी, थोडे दिन बाद ही, वाइसराय से मिले । उन्होने नात्सीवाद की पराजय तथा ब्रिटेन और फ्रान्स की विजय की कामना 'हरिजन' में लिखकर प्रकट की। इसके बाद वर्धा से कांग्रेस कार्यसमिति ने एक सप्ताह बाद एक वक्तव्य प्रकाशित किया जिसमे ब्रिटिश सरकार से उसके युद्ध तथा शान्ति के उद्देश्य पूछे तथा यह आग्रह किया कि भारत को स्वाधीन राष्ट्र घोपित कर दिया जाय । परन्तु सरकार ने काग्रेस की इस मॉग को स्वीकार नही किया । अतः जिन अाठ प्रान्तो में कांग्रेस-मन्त्रिमण्डल शासन-सचालन कर रहे थे, उन्हें पद-त्याग का अादेश दिया गया। इस प्रकार नवम्बर १९३६ में भारत में वैधानिक संकट पैदा होगया | नवग्बर १९३९ से ८ प्रान्तों में गवर्नर ने शासन-विधान को स्थगित कर दिया । प्रान्तीय धारासभाएँ स्थगित कर दीगई तथा स्वय गवर्नर आई० सी० एस० सलाहकारों की मदद से शासनकार्य चलाने लगे । (पीछे सन् १९४० मे अासाम तथा उडीसा में प्रतिक्रियावादियों द्वारा मंत्रि-मण्डल कायम होगए ।) ब्रिटिश वाइसराय ने सरकार की ओर से ८अगस्त १९४० को यह घोषणा की कि युद्ध की समाप्ति के बाद भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य दिया। जायगा तथा भारतीय एक परिषद् का सगठन कर उसमें भारत के भावी शासन-विधान की रूपरेखा तैयार कर सकेंगे । | घोषणा निस्सार सिद्ध हुई । गान्धोजी ने युद्ध के सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट करने के लिये भाप्रण-स्वातन्त्र्य की मॉग की, जेसी कि ब्रिटेन में, युः ॐ सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट करने की, वहॉ के नागरिकों को प्राप्त है। इस सम्बन्ध में भी उनका प्रयास जव विफल हुआ, तो उन्होने १९४० के अक्टूबर में युविरोधी व्यक्तिगत सत्याह छेड़ दिया, किन्तु उम्का प्रयोगबहुत सीमित वा । अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय परिस्थिते के सम्बन्ध में इन बीच महात्मा ने