पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२४२

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२३६ आरत ७ दिसम्बर को जापान ने प्रशान्त महासागर में हमला कर दिया और सुदूरपूर्व में युद्ध छिड़ गया। ३१ दिसम्बर की बारदोली की कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की बैठक मे सत्याग्रह स्थगित कर दिया गया महात्मा गाधी भी इसी बैठक में देश के नेतृत्व-भार से मुक्त कर दिये गये ।। फरवरी ४२ में मार्शल च्याग काई-शेक भारत अाये और उन्होंने अपनी विदाई के वक्तव्य में प्रबल आशापूर्ण अपील की कि ब्रिटिश सरकार भारत को स्वतन्त्र घोषित कर देगी। मार्च ४२ मे सर स्टेफर्ड क्रिप्स अपने प्रस्ताव लेकर भारत आये । इस प्रयास का भी, क्रिप्स-योजना में वास्तविक अधिकार न मिलने के अभाव के कारण, कोई सुफल नहीं निकला। १ मई १९४२ को प्रयाग के अ०भा० काग्रेस कमिटी के अधिवेशन में राजनीतिक स्थिति पर एक प्रस्ताव स्वीकार किया गया । इस प्रस्ताव में क्रिप्स-योजना की आलोचना तथा भारत के युद्ध में सहयोग देने के सवध मे, अपना मत प्रकाशित करने के बाद स्पष्ट शब्दों में यह घोषणा की कि---- कमिटी इससे इनकार करती है कि भारत को किसी बाहरी राष्ट्र के हस्तक्षेप अथवा उसके द्वारा आक्रमण से स्वाधीनता मिल जायगी । यदि भारत पर अाक्रमण हुआ तो उसका प्रतिरोध किया जायेगा । यह प्रतिरोध केवल अहिसात्मक असहयोग का ही रूप धारण कर सकता है । इसी बैठक में श्री जगतनारायण लाल का प्रस्ताव भी कमिटी ने स्वीकार किया जिसके अनुसार काग्रेस भारत की अखण्डता के लिये प्रतिज्ञाबद्ध है। इस बैठक मे श्री राजगोपालाचारी ने इस आशय का एक प्रस्ताव पेश किया कि कांग्रेस को मुसलिम लीग की पाकिस्तान की मॉग को स्वीकार कर लेना चाहिए, किन्तु यह स्वीकृत न होसका । इसके बाद राजाजी ने कांग्रेस कार्य-समिति, मदरास प्रान्तीय कांग्रेस समिति तथा अ०भा० काग्रेस समिति की सदस्यता से त्यागपत्र देदिया । इसके बाद १४ जुलाई १९४२ को वर्धा में कांग्रेस कार्यकारिणी कमिटी का अधिवेशन हुआ । क्रिप्स-योजना की विफलता के बाद से ही गांधीजी ने ‘हरिजन' मे 'भारत छोड़ो' (Quit India) आन्दोलन की चर्चा शुरू करदी