पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२७४

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महादेव देसाई प्रथम राष्ट्रपति बनकर वह स्वदेश लौटा । सन् १९२०, २८ तथा '३४ मे, क्रमशः तीन बार, वह राष्ट्रपति चुना गया। १४ दिसम्बर १९३५ को, स्वास्थ्य ख़राब होजाने के कारण राष्ट्रपति के पद से त्यागपत्र देदिया । १४ सितम्बर १६.३७ को ८७ वर्ष की आयु में उसका देहान्त होगया । चेकोस्लोवाकी अब तक, दन्तकथाश्रो के रूप मे, उसके गुण गाते हैं। उसका पुत्र, इशान मसारिक, आजकल लन्दन-प्रवासी चैकोस्लोवाक-सरकार में परराष्ट्रमन्त्री है । दार्शनिक के रूप में टामस मसारिक बुद्धिवादी और मानवतावादी था । वह व्यावहारिक आचार का समर्थक था, किन्तु जर्मन आदर्शवादी दर्शन तथा मार्क्सवाद का अालोचक था । वह प्रजातत्र का पोषक और अपने देश का, पाश्चात्य देशों के आधार पर, पुनर्जागरण चाहता था। मसारिक के यह वाक्य कैसे मार्के के हैं:-“प्रजातन्त्र आधारित है वादविवाद पर । राष्ट्र केवल उन अादशों के आश्रय पर जीवित रहते हैं, जिनके द्वारा उनके अस्तित्व का विकास हुयावह आदर्श ईसा के ( प्रेममूलक ) आदर्श हैं, (अत्या- ' , चारी) सीजर के नही। वितण्डावाद वस्तुतः कोई } योजना नही है । इतिहास हमे सिखाता है कि । सभी राष्ट्र अपनी हठधर्मी के कारण नष्ट हुए-- फिर वह हठधर्मी जातिगत हो, राजनीतिक हो, धार्मिक हो अथवा वर्गगत । राष्ट्र की (आत्म) रक्षा के लिए क्रान्ति बिलकुल वैध साधन है। किंतु अन्य - सब साधनो के समाप्त होजाने पर ही क्रान्ति की । आवश्यकता उत्पन्न होती है। मानवता अपने प्रत्येक रूप मे शान्तिवाद नहीं है ।” | महादेव हरिभाई देसाई–लगभग ५१ वर्ष पूर्व सूरत जिले के एक गॉव मे जन्म हुआ । बम्बई से बी० ए० पास किया और वही प्रान्तीय सरकार के सेक्रेटरियट में अनुवादक नियुक्त होगये । यही काम करते समय क़ानून की परीक्षा उत्तीर्ण की और अहमदाबाद में वकालत शुरू की । इस पेशे से -- । । -