पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/२८७

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मुसोलिनी २८१ फलस्वरूप पार्लमेट के चेम्बर में उसके ३८ सदस्य पहुँच गये, किन्तु मन्त्रि-मण्डल मे यह लोग शरीक नही हुए। इन्हीं दिनो इस आन्दोलन का नाम फासिज्म | पड़ गया । सन् १९२२ मे इटली की स्थिति अशान्तिमय होउठी थी। क्रान्तिवादी-समाजवादियो की सत्ता प्रबल थी, कारख़ानो पर भी उनका ही नियंत्रण था और सरकार कमज़ोर होरही थी। तब ४०,००० फासिस्तो ने, २८ अक्तूबर १६२२ को, नेपल्स की फासिस्त-दल-काग्रेस के बाद, राजधानी की ओर कदम बढ़ाया । मुसोलिनी उनका नेता ( Duce ) था । राजधानी मे इन्होने शासन सत्ता अपने हाथ में लेने की मॉग पेश की । प्रधान मन्त्री फाक्ता की कमज़ोर सरकार दब गई और बादशाह ने मुसोलिनी को प्रधान मंत्री नियुक्त कर दिया । | मुसोलिनी ने सरकार बनाई और फासिस्तो के साथ-साथ कुछ दक्षिणपथी लिवरल तथा कैथलिक पादरी भी शामिल किये । समाजवादियों ने इसका प्रतिरोध क्रिया, किन्तु फ़ासिस्तो ने इस विरोध को भंग कर दिया । सन् १९२३ में मुसोलिनी ने चुनाव-सम्बन्धी हुक्म निकाला कि जिस दल को मत-सख्या का एक-चौथाई प्राप्त होगा वही पार्लमेट मे दो-तिहाई प्रतिनिधित्व का अधिकारी बन सकेगा । अप्रेल १९२४ के चुनाव मे, इस कारण, फासिस्त दल को बहु-संख्यक मत मिले । १० जून १९२४ को समाजवादी नेता, मतियोती, का उग्र फासिस्तो ने वध कर डाला । इस हत्याकाण्ड से इटली में राजनीतिक संघर्ष उट वडा हुआ। पार्लमेट का विरोधी दल और समाजवादी, साम्यवादी, लिबरल तथा पादरी सदस्य विरोध मे चेम्बर से उठकर बाहर चले आये और उन्होंने सरकार का बहिष्कार कर दिया । । सन् १९२५ मे मुसोलिनी ने बलपूर्वक सरकार को हथिया लिया और वह इटली का अधिनायक बन बैठा । १९२६ मे विरोधी दलों का उसने दमन किया, उनके पार्लमेन्टरी अधिकार रद कर दिये और उनके नेताओं पर अत्याचार किये । बहुतेरे उनमें से विदेश को भाग गये । । इसके बाद मुसालिनी ने फासिस्त दुग पर इटली का सगठन प्रारम्भ दिया । राष्ट्रीय शिक्षा का प्रचार, देश का पुनर्शवीग शोर अनेक प्रार्थिक विकास उनने किये । १६३३ में, जर्मनी में राष्ट्रीय-समाजवादी दल के अभ्युदय के बाद भी, टली की वैदेशिक नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ ।