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राजेन्द्रप्रसाद
 

की सरकार ने भी त्याग-पत्र दे दिया । सन् १६४० मे युद्ध-विरोधी-सत्याग्रह मे गिरफ्तार किये गये । सन् १६४२ मे पाकिस्तान के प्रश्न पर गान्धीजी से आपका मतभेद होगया और अापने काग्रेस कार्य- कारिणी समिति से त्यागपत्र दे दिया । इस कारण ६ अगस्त'४२ से देश मे शुरू हुए दमन मे श्राप । नहीं पकडे गये । देश मे उत्पन्न हुई विकट स्थिति को सुलझाने के लिये आप प्रयत्नशील हैं। आपकी राजनीतिमत्ता की प्रशसा बरतानिया और अम- रीका के प्रमुख पत्र और विचारक भी करते हैं, किन्तु अापका अथक प्रयत्न अपने देश मे इस समय व्यर्थ जा रहा है। गुत्थी को सुलझाने के लिये महात्मा गान्धी से मिलने की आज्ञा, गत नवम्बर मे, आपने वाइसराय से मॉगी, किन्तु वह अस्वी- । । कृत हुई। भारतीय पहेली के निपटारे के लिये आपने मि० जिन्ना से भी व्यर्थ भेट की । रॉजर-मिशन-अक्टूबर १६४० मे, ब्रिटिश मत्रि-मण्डल की ओर से, सर अलेक्जेडर रॉजर की अध्यक्षता मे, एक सभ्य-मण्डल भारत में पूर्वी राष्ट्र- सम्मेलन मे सम्मिलित होने के लिये, भेजा गया । इस मिशन का सामान्य उद्देश्य भारत को इस योग्य बनाना था कि वह अपनी रक्षा के लिये न केवल अावश्यक वस्तुयो का निर्माण कर सके प्रत्युत् इससे भी अधिक वह साम्राज्य की रक्षा मे अधिक योगदान देसके। वह विशेष रूप से मध्य-पूर्व तथा स्वेज नहर मे सेनाओं के लिये उपयुक्त रसद तथा अन्य युद्ध-सामग्री भेज सके । इस उद्देश्य से इस मिशन के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यो ने बम्बई, मदरास, बगाल, संयुक्त-प्रान्त, बिहार तथा मध्य-प्रदेश आदि प्रान्तो मे युद्ध बनाने वाले कारखानो का निरीक्षण किया और इसका पता लगाया कि भारत के कारखानो मे कितने प्रकार के अस्त्र-शस्त्र किस प्रकार बनाये जाते और - बनाये जा सकते हैं, और इस व्यवसाय का सगठन किस प्रकार किया गया है । . . राजेन्द्रप्रसाद, डाक्टर-भारतीय नेता, जन्म ३ दिसम्बर १८८४ ई० ।