पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४३८

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हिटलर कर दिया । ३० अगस्त को दांज़िग और कोरीडर के सम्बन्ध मे एक अल्टीमेटम पोलैण्ड के राजदूत को देदिया गया, किन्तु इसके फौरन बाद हिटलर ने घोषणा की कि पोलैण्ड ने अल्टीमेटम लेने से इनकार किया है अगर्चे उस वक्त तक यह पोलैण्ड की सरकार के पास पहुंचा तक न था। १ सितम्बर १६३६ को हिटलर ने दांजिग जर्मनी में मिला लिया और पोलैण्ड पर धावा कर दिया । ३ सितम्बर को, पालैण्ड को अपने दिये हुए वचन के अनुसार, ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध युद्व-घोषणा करदी । १६४० के अप्रैल और मई मे हिटलर ने नारवे, डेनमार्क, हालेण्ड, वेलजियम, लक्समबर्ग और फ्रान्स पर अाक्रमण कर दिया । अप्रैल १९४१ मे यूगोस्लाविया और यूनान पर, और जून १६४१ मे, बिना कोई चेतावनी दिये, सोवियत संघ पर हमला कर दिया, जिसके साथ उसका समझौता था । ११ दिसम्बर १६४१ को उसने संयुक्तराज्य अमरीका के विरुद्ध युद्ध-घोषणा करदी । हिटलर का यह रवय्या रहा है कि अपने विरोधियों को तत्काल शान्त कर देने और वास्तव में अवसर प्राप्त करने के लिए शुरू मे वह दृढ़तापर्वक वचन दे देता है, किन्तु जैसे ही मौका पाता है फौरन् अपने वादे से फिर जाता है । जर्मन अल्यसंख्यको के साथ ज्यादती होने का बहाना वह हमेशा लेता रहा है। उसकी नीति एक के बाद एक देश का खत्म करने की रहा है। हिटलर की विचारधारा में नवीन बात न कोई नही है। उसकी योजना का यावार पुरातन अपिल-जर्मनवाद है, जिससे वह अपने युवाकाल से ही प्रभावित है। पूर्वीय योरप म • जर्मन-विस्तार के निदान्त में उसने जनरल ... ल्यूटनट की बत्त-लितात्म-साथ की नीति " ने सोचा है, और उतना नमल या पाजन , पुरातन जमनावाच्यवाद और सामरिम्वाद को चालू र बने हैं। Utt.