पृष्ठ:Antarrashtriya Gyankosh.pdf/४४३

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४३८ हिरोहितो CxA-- का विकास करना। (२) मोलिक शिक्षा के लिये उपयोगी साहित्य का निर्माण करना । ( ३ ) मौलिक शिक्षा के प्रसार के लिये प्रचार कार्य करना । ( ४ ) मौलिक राष्ट्रीय शिक्षा को स्वीकार करने के लिये प्रान्तीय सरकारो से सिफारश करना। ___महात्माजी की प्रेरणा तथा सघ के प्रयत्नो के फलस्वरूप भारत में मौलिक राष्ट्रीय शिक्षा (Basic National Education) का काफी प्रचार हुग्रा हैं । काग्रेसी मत्रि-मण्डलो ने, अपने अपने प्रान्तो में, इस नवीन शिक्षा-प्रणाली का प्रयोग करने की व्यवस्था की । मव्य-प्रान्त मे इसके अधीन विद्यामन्दिर की योजना का प्रारम्भ हुया । मयुक्त-प्रान्त, बम्बई, बिहार, मदरास मे बुनियादीतालीम की शिक्षा के लिये अध्यापको के वास्ते ट्रेनिग कालिज खोले गये। संघ की अोर से 'नई तालीम' नामक एक मासिक पत्र १ जनवरी १६३६ से प्रकाशित होता . है । श्री ई० डब्ल्यू०, आर्यनायकम् (सिहली AN ईसाई सज्जन) इस सघ के मत्री हे तथा उनकी । सहायिका उनकी पत्नी श्रीमती पाशा देवी हैं । हिमलर, हेनरिख–जर्मन-नात्मी नेता; नात्सी जर्मनी की गुप्त राजनीतिक-पुलिस,गेस्टापो, तथा नात्सी ब्लैक गार्ड (कालीवर्दी सेना ) का प्रधान-सचालक, जर्मनी में वह नात्सीवाद पर होनेवाले अाक्रमण से दल की रक्षा करता है। जिस जिस प्रदेश को हिटलर ने विजय किया है, हिमलर उस देश को इस सेना के बल पर अपने अधीन रखता है। स्वय जर्मनी मे हिमलर का बहुत आतङ्क है। हिरोहितो-जापान का सम्राट , जिसका जन्म सन् १६०१ मे हुआ और २५ दिसम्बर १६२६ को राज्य-सिहासन पर बैठा । जापानी साम्राज्य २६६० वर्ष पुराना बताया जाता है, और हिरोहितो राजवश मे १२४वाँ . है । जापानी अपने को उत्तर-पूर्वीय एशिया से गये हुए आर्यों की


hamutamALEN .