पृष्ठ:Garcin de Tassy - Chrestomathie hindi.djvu/४३

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॥२७॥ ब्रामण अरु बकरा अपनी ऊपमा को जो दुर्जन को सत्यवक्ता करि 3 उल्के जैसे एक ब्राह्मण बोकरा निमति तीन ठग राजा कति यह कैसी कथा है। काग कलेत है। एक ब्राह्मण जग्य करिबे को और गांव ते एक व आवत तीन ठगनि देष्यो। तब वे तीन्यो दुष्ट भागे : करि कोस एक एक के अंतरे तीन्यो बेठे। तब वन । पुख्यो। अरे ब्राह्मण यह कुकरा कांधे पर चलाये जात है। तब ब्राह्मण कहि। यह कुकर न कोई है। आगे जाते कोस एक पर दुसरे लु ठगि उहि भां ऐसे प्रकार दुष्ट के बचन सुनि बामण बकरा कांधे पा बलुरि कांधे धरि संदेह करत बांभन चल्यो। जाते दुष्ट महांत हु की बुधि चलतु हे संदेह मे पस्तु है जो प्रतीति को सु मरे जेसे चित्रकर्म मुवो। राजा पूछी है। कागु कल्तुि है। कौन तु देस बड़े बन मे एक स्यंषु रहे। ता को सेवक बाब स्यारु कागु ये तीनं फिरत एक उट देष्यो। उट कू पुथ्यो तुम कहां ते अ तब उनि उठि अपुनी सर्व बाती कहि जू जैसी ठुति' करतु हे लु संग ते भूलि इह बन मे प्रात्यो लौं। तब । को दीयो। स्यंघ पुछत को है या कहां ते प्रायो रामा रह उट है संग ते भूलि इल बन मे पायो है।।