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हिन्द स्वराज्य

क़सूरके कारण ही वे यहाँ रहते हैं और हमारा क़सूर दूर होगा तब वे यहाँसे चले जायेंगे या बदल जायेंगे।

(१३) दूसरे हिन्दुस्तानियोंकी तरह जो यह समझेगा कि मातमके वक्त मौज-शौक नहीं हो सकते। जब तक हमें चैन नहीं है तब तक हमारा जेलमें रहना या देशानिकाला भोगना ही ठीक है।

(१४) जो दूसरे हिन्दुस्तानियोंकी तरह यह समझेगा कि लोगोंको समझानेके बहाने जेलमें न जानेकी खबरदारी रखना निरा मोह है।

(१५) जो दूसरे हिन्दुस्तानियोंकी तरह यह समझेगा कि कहनेसे करनेका असर अद्भुत होता है; हम निडर होकर जो मनमें है वही कहेंगे और इस तरह कहनेका जो नतीजा आये उसे सहेंगे, तभी हम अपने कहनेका असर दूसरों पर डाल सकेंगे।

(१६) जो दूसरे हिन्दुस्तानियोंकी तरह यह समझेगा कि हम दुख सहन करके ही बंधन यानी गुलामीसे छूट सकेंगे।

(१७) जो दूसरे हिन्दुस्तानियोंकी तरह समझेगा कि अंग्रेजोंकी सभ्यताको बढ़ावा देकर हमने जो पाप किया है, उसे धो डालनेके लिए अगर हमें मरने तक भी अंदमानमें रहना पड़े, तो वह कुछ ज्यादा नहीं होगा।

(१८) जो दूसरे हिन्दुस्तानियोंकी तरह समझेगा कि कोई भी राष्ट्र दुख सहन किये बिना ऊपर चढ़ा नहीं है। लड़ाईके मैदानमें भी दुख ही कसौटी होता है, न कि दूसरेको मारना। सत्याग्रहके बारेमें भी ऐसा ही है।

(१९) जो दूसरे हिन्दुस्तानियोंकी तरह समझेगा कि यह कहना कुछ न करनेके लिए एक बहाना भर है कि 'जब सब लोग करेंगे तब हम भी करेंगे'। हमें ठीक लगता है इसलिए हम करें, जब दूसरोंको ठीक लगेगा तब वे करेंगे-यही करनेका सच्चा रास्ता है। अगर मैं स्वादिष्ट[१] भोजन देखता हूँ, तो उसे खानेके लिए दूसरेकी राह नहीं देखता। ऊपर कहे मुताबिक प्रयत्न[२] करना, दुख सहना यह स्वादिष्ट भोजन है। ऊबकर लाचारीसे करना या दुख सहना निरी बेगार है।

  1. ज़ायकेदार।
  2. कोशिश।