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उन्हें इस गीत के बाद प्रसाद देते थे। प्रसाद में एक पसेरी गेहूं और गुड़ होता था। यह भी सब वहीं पाल पर बांट दिया जाता था‌।

गड़ीसर में कहां कहां से पानी आता है, यह समझ पाना कठिन काम है। रेत का कण तरह की मेंड़बंदी जो पानी की एक एक बूंद गड़ीसर के तरफ से मोड़ कर लाती है) भी बनाई गई थी। तालाब के नीचे बने थे अनेक वेरे यानी कुएं। और कभी इन बेरों तक की प्रशंसा में संस्कृत और फारसी में पंक्तियां लिखी गई थीं।

आज गड़ीसर में नहर का पानी दूर पाइप से लाकर डाला जा रहा है। यह विवरण लिखते-लिखते सूचना मिली कि जो पाइप लाइन टूट गई थी, वह अब फिर ठीक हो गई है और गड़ीसर में नहर का पानी फिर से आने लगा है। पर पाईप लाइन का कोई भरोसा नहीं। लिखते-लिखते ठीक हो जाने वाली पाइप लाइन, पढ़ते-पढ़ते फिर से टूट सकती है।

बाप के तालाब की यात्रा बीकानेर की संस्था उरमूल ट्रस्ट के श्री अरविंद ओझा की मदद से की गई। बाप की कहानी हमें उस्ताद निजामुद्दीन से मेिंली हैं। उनका पता है: बाल भवन, कोटला रोड़, नई दिल्ली।
टोडा रायसिंह
के बांध की
चक्कियां
जसेरी का जस हमने श्री जेलूसिंह भाटी से सुना था। फिर श्री भाटी के सौजन्य से ही इस भव्य तालाब के दर्शन हो सके। और
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राजस्थान की
रजत बूंदें
जगहोंलाब सूख जाते हैं, उनके आसपास के कुएं चलते रहते हैं, लेकिन यहां आसपास के कुएं सूख जाते हैं, ज़सेंरी में पानी बना रहता है। यहां पास ही वन विभाग की एक पौधशाला भी है। उनका पानी का अपना प्रबंध भी गर्मी में जवाब दे जाता है तो वे दूर जसेरी के पानी से अपने पौधों को टिकाए रख पाते हैं।

जसेरी के प्रति भी लोगों का प्रेम अद्भुत है। श्री चैनाराम भील हैं। ऊंट और जीप से पर्यटकों को यहां-वहां घुमा कर अपनी जीविका चलाते हैं पर काम छोड़ सकते हैं। उन्होंने जसेरी की टूट-फूट को कैसें ठीक किया जा सकता है, इस पर काफीै सोचाविचारा है। यह सारा नक्शा कागज पर नहीं, उनके मन में हैं।

जसेरी पर गांधी शांति केंद्र, हैदराबाद और गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली ने एक सुंदर पोंस्टर भी प्रकाशित किया है|

जल और अन्न का अमरपटो

ख़हीनों की प्रारंभिक जानकारी हमें जैसलमेर में पालीवालों के उजड़े हुए गांवों में श्री किरण नाहटा और जैसलमेर जिला खादी ग्रामोदय परिंषद के श्री राजू प्रजापत के साथ घूमते हुए मिली थी। बाद में इसे बढ़ाया पानी मार्च के श्री अरुण कुमार और श्री शुभूपटवा ने। जैसलमेर की कुछ प्रसिद्ध खडीनों के चित्र वयोवृद्ध गांधीवादी श्री भगवानदास माहेश्वरीजों ने भिजवाए। और आगे विस्तार से इस खादी ग्रामोदय परिषद के श्री चीइथमल के साथ की गई यात्राओं से

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