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२३ कुदरती इलाजमे रामनाम

प्राकृतिक उपचारकके इलाजोमे सबसे समर्थ इलाज रामनाम है। इसमे अचम्भेकी कोई बात नही । एक मशहूर वैद्यने अभी उस दिन मुझसे कहा था 'मैने अपनी सारी जिन्दगी मेरे पास आनेवाले बीमारोको तरह-तरहकी दवाकी पुडिया देनेमे बिताई है। लेकिन जब आपने शरीरके रोगोको मिटानेके लिए रामनामकी दवा बताई, तब मुझे याद पडा कि चरक और वाग्भट जैसे हमारे पुराने धन्वन्तरियोके वचनोसे भी आपकी बातको पुष्टि मिलती है।' आध्यात्मिक रोगोको (आधियोको) मिटानेके लिए रामनामके जपका इलाज बहुत पुराने जमानेसे हमारे यहा होता आया है। लेकिन चूकि बड़ी चीजमे छोटी चीज भी समा जाती है, इसलिए मेरा यह दावा है कि हमारे शरीरकी बीमारियोको दूर करनेके लिए भी रामनामका जप सब इलाजोका इलाज है। प्राकृतिक उपचारक अपने बीमारसे यह नही कहेगा कि ‘तुम मुझे बुलाओ तो मै तुम्हारी सारी बीमारी दूर कर doo।' वह तो बीमारको सिर्फ यह बताएगा कि प्राणीमात्रमे रहनेवाला और सब बीमारियोको मिटानेवाला तत्त्व कौनसा है। किस तरह उस तत्त्वको जाग्रत किया जा सकता hai, और कैसे उसको अपने जीवनकी प्रेरक शक्ति बनाकर उसकी मददसे अपनी बीमारियोको दूर किया जा सकता है। अगर हिन्दुस्तान इस तत्त्वकी ताकतको समझ जाए, तो हम आजाद तो हो ही जाए, लेकिन उसके अलावा आज हमारा जो देश बीमारियो और कमजोर तबीयतवालोका घर बन बैठा है, वह तन्दुरुस्त और ताकतवर शरीरवाले लोगोका देश बन जाए । रामनामकी शक्तिकी अपनी कुछ मर्यादा है और उसके कारगर होनेके लिए कुछ शर्तोका पूरा होना जरूरी है। रामनाम कोई जतर-मतर या जादू-टोना नही । जो लोग खा-खा कर खूब मोटे हो गये है, और जो अपने मुटापेकी और उसके साथ बढनेवाली बादीकी आफतसे बच जानेके बाद फिर तरह-तरहके पकवानोका मजा चखनेके लिए इलाजकी तलाशमे रहते hai,

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