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प्रार्थना-प्रवचनोमे से ५७

दे सकता। लेकिन अगर आप भगवानसे प्रार्थना करे, तो वह आपके दुखो और चिताओको जरूर मिटा सकता है। लेकिन प्रार्थनाको असरकारक बनानेके लिए हमे सच्चे दिलसे रामधुनमे भाग लेना चाहिये, और तभी हमे शाति और सुखका अनुभव हो सकता है। इसके अलावा, दूसरी शते भी है, जिन्हे पूरा करना जरूरी है। हमें उचित खुराक लेना चाहिये, काफी सोना चाहिये और कभी गुस्सा नही करना चाहिये। सबसे पहली बात तो यह है कि हमे कुदरतके साथ मेल साध कर रहना चाहिये और उसके नियमोका पालन करना चाहिये।

                                                          --पूना, २२-३-४६
तैयारी जरूरी
प्रार्थनाके बाद सभामे भापण करते हुझे गाधीजीने कहा ईमानदार स्त्री-पुरुषोने मुझे कहा है कि पूरी-पूरी कोशिश करने पर भी वे यह नही कह सकते कि वे दिलसे रामनाम लेते है। उन्हे मेरा जवाब यह है कि वे कोशिश करते रहे और अपार धीरज रखे । एक लडकेको डॉक्टर बननेके लिए कम-से-कम १६ सालका कठिन अभ्यास जरूरी होता है। तब फिर रामनामको दिलमे बसानेके लिए कितना ज्यादा समय जरूरी होना चाहिये ।
                                                    - नई दिल्ली, २०-४-'४६                                                      भीतरी और बाहरी पवित्रता

जो आदमी रामनाम जपकर अपनी अन्तरात्माको पवित्र बना लेता है, वह बाहरी गन्दगीको बरदाश्त नही कर सकता । अगर लाखो-करोडो लोग सच्चे हृदयसे रामनाम जपे, तो न तो दगे – जो सामाजिक रोग है–हो। और न बीमारी हो । दुनियामे रामराज्य कायम हो जाय।

                                                    - नई दिल्ली, २१-४-'४६

रामनामका दुरुपयोग

आज प्रार्थनाके बादके भाषणमे गाधीजीने कुदरती इलाजका जिक्र किया । यानी तन, मन और आत्माकी बीमारियोको खास तौर पर रामनामकी मददसे मिटानेके बारेमे समझाया । एक भाईने लिखा था कि कुछ लोग अन्ध-विश्वासकी वजहसे कपडो पर रामनाम छपवा लेते है, और उन्हे अपने