लेखक:अनुपम मिश्र

परिचय
[सम्पादित करें]अनुपम मिश्र का जन्म 1947 में भारत में हुआ था। वे प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक एवं समाजसेवी राजेन्द्र मिश्र के पुत्र थे। अनुपम मिश्र गांधी शांति प्रतिष्ठान से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण और जल संचयन के परंपरागत भारतीय तरीकों पर कार्य करते रहे। उन्होंने राजस्थान, बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में पारंपरिक जल संरचनाओं, तालाबों, जोहड़ों और बावड़ियों पर व्यापक अध्ययन किया।
कार्य
[सम्पादित करें]अनुपम मिश्र की लेखनी में भारतीय समाज की परंपराओं और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना झलकती है। उनके मुख्य ग्रंथों में शामिल हैं:
- आज भी खरे हैं तालाब (2004) – पारंपरिक जलसंरचनाओं की उपयोगिता और उनकी सामाजिक भूमिका पर आधारित शोधपरक कृति।
- साफ़ माथे का समाज (2006) – जल और पर्यावरण के प्रति भारतीय समाज की सोच, व्यवहार और उसके सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण।
- राजस्थान की रजत बूँदें (1995) – राजस्थान की पारंपरिक जलव्यवस्था और उसकी उपयोगिता पर केंद्रित पुस्तक।
विषयवस्तु एवं दृष्टिकोण
[सम्पादित करें]अनुपम मिश्र की रचनाएँ पर्यावरणीय चेतना और गांधीवादी जीवनशैली पर आधारित हैं। उन्होंने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि किस प्रकार ग्रामीण भारत के लोग बिना किसी आधुनिक तकनीक के, प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जल जैसे संसाधनों का संरक्षण करते हैं।
सार्वजनिक व्याख्यान और योगदान
[सम्पादित करें]वे देश-विदेश में अनेक मंचों पर बोलते रहे और उनकी भाषा सरल, सहज तथा जनमानस से जुड़ी हुई थी। वे तकनीकी शब्दावली से दूर रहकर भी जटिल विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में सक्षम थे।