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अक्टूबर की निर्वाचित पुस्तक
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सप्ताह की पुस्तक
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Hind swaraj- MK Gandhi - in Hindi.pdf

हिन्द स्वराज, महात्मा गाँधी की पहली पुस्तक है जिसमें उन्होंने अपने विचारों को सुव्यवस्थित रूप दिया है। दक्षिण अफ्रीकाके भारतीय लोगोंके अधिकारोंकी रक्षाके लिए सतत लड़ते हुए गांधीजी १९०९ में लंदन गये थे। वहां कई क्रांतिकारी स्वराज्यप्रेमी भारतीय नवयुवक उन्हें मिले। उनसे गांधीजीकी जो बातचीत हुई उसीका सार गांधीजीने एक काल्पनिक संवादमें ग्रथित किया है। इस संवादमें गांधीजीके उस समयके महत्त्वके सब विचार आ जाते हैं। किताबके बारेमें गांधीजी ने स्वयं कहा है कि "मेरी यह छोटीसी किताब इतनी निर्दोष है कि बच्चोंके हाथमें भी यह दी जा सकती है। यह किताब द्वेषधर्मकी जगह प्रेमधर्म सिखाती है; हिंसाकी जगह आत्म-बलिदानको स्थापित करती है; और पशुबलके खिलाफ टक्कर लेनेके लिए आत्मबलको खड़ा करती है।" ( हिन्द स्वराज पूरा पढ़ें)


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पूर्ण पुस्तक
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Hind swaraj- MK Gandhi - in Hindi.pdf

हिन्द स्वराज, महात्मा गाँधी की पहली पुस्तक है जिसमें उन्होंने अपने विचारों को सुव्यवस्थित रूप दिया है। दक्षिण अफ्रीकाके भारतीय लोगोंके अधिकारोंकी रक्षाके लिए सतत लड़ते हुए गांधीजी १९०९ में लंदन गये थे। वहां कई क्रांतिकारी स्वराज्यप्रेमी भारतीय नवयुवक उन्हें मिले। उनसे गांधीजीकी जो बातचीत हुई उसीका सार गांधीजीने एक काल्पनिक संवादमें ग्रथित किया है। इस संवादमें गांधीजीके उस समयके महत्त्वके सब विचार आ जाते हैं। किताबके बारेमें गांधीजी ने स्वयं कहा है कि "मेरी यह छोटीसी किताब इतनी निर्दोष है कि बच्चोंके हाथमें भी यह दी जा सकती है। यह किताब द्वेषधर्मकी जगह प्रेमधर्म सिखाती है; हिंसाकी जगह आत्म-बलिदानको स्थापित करती है; और पशुबलके खिलाफ टक्कर लेनेके लिए आत्मबलको खड़ा करती है।" ( हिन्द स्वराज पूरा पढ़ें)


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विज्ञान
विज्ञान और समाज विज्ञान
समाज विज्ञान

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  • इतिहास = ३३
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रचनाकार
रचनाकार

मोहनदास करमचंद गाँधी
महात्मा गाँधी

मोहनदास करमचन्द गांधी (२ अक्टूबर १८६९ - ३० जनवरी १९४८) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत, दार्शनिक, लेखक एवं पत्रकार थे। विकिस्रोत पर उपलब्ध उनकी रचनाएँ:— हिन्द स्वराज्य – १९०७, गाँधी-दर्शन की पहली सैद्धांतिक पुस्तक।, सत्य के प्रयोग - १९४८, आत्मकथा। रामनाम - १९४९, गाँधी के विचारों का संग्रह।

रामचंद्र शुक्ल

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (11 अक्टूबर, 1884ईस्वी- 2 फरवरी, 1941ईस्वी) हिन्दी आलोचक, निबन्धकार, साहित्येतिहासकार, कोशकार, अनुवादक, कथाकार और कवि थे। विकिस्रोत पर उपलब्ध उनकी रचनाएँ- रस-मीमांसा – १९४९, चिन्तामणि, कला और आधुनिक प्रवृत्तियाँ, काव्य में रहस्यवाद, हिन्दी साहित्य का इतिहास – 1९२९

प्रेमचंद
भारतीय डाक टिकट पर प्रेमचंद

प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८० – ८ अक्टूबर १९३६) हिन्दी और उर्दू के अत्यंत लोकप्रिय कथाकार एवं विचारक थे। विकिस्रोत पर उपलब्ध उनकी रचनाएँ:

  1. उपन्यास- सेवासदन – १९१८, हिंदी में प्रकाशित पहला उपन्यास।, प्रेमाश्रम – १९२२, किसान आंदोलन की महागाथा। रंगभूमि - १९३१, मंगला प्रसाद पारितोषिक से सम्मानित।, गबन - १९३१, साधारण स्त्री जालपा के अद्वितीय बनने की गाथा।, कर्मभूमि – १९३२, किसानों की लगान समस्या पर केंद्रित उपन्यास।, गोदान – १९३६, औपनिवेशिक चक्की में पिसते किसान जीवन की महागाथा।
  2. कहानी संग्रह- पाँच फूल – १९२९, नव-निधि – १९४८, प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ – १९५०, मानसरोवर १ तथा मानसरोवर २
  3. निबंध - कुछ विचार - निबंध और व्याख्यान संग्रह।

विकिस्रोत पर उपलब्ध सभी लेखकों के लिए देखें- समस्त रचनाकार अकारादि क्रम से।


आज का पाठ

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सेवासदन प्रेमचंद द्वारा रचित [[उपन्यास है जिसका प्रकाशन इलाहाबाद के हंस प्रकाशन द्वारा १९१९ ई॰ में किया गया था।

"पश्चाताप के कड़वे फल कभी-न-कभी सभी को चखने पड़ते है, लेकिन और लोग बुराइयों पर पछताते है, दारोगा कृष्णचन्द्र अपनी भलाइयों पर पछता रहे थे। उन्हें थानेदारी करते हुए पचीस वर्ष हो गए; लेकिन उन्होंने अपनी नीयत को कभी बिगड़ने न दिया था। यौवनकाल में भी, जब चित्त भोग-विलास के लिए व्याकुल रहता है उन्होंने नि.स्पृहभाव से अपना कर्तव्य-पालन किया था। लेकिन इतने दिनों के बाद आज वह अपनी सरलता और विवेक पर हाथ मल रहे थे। उनकी पत्नी गंगाजली सती-साध्वी स्त्री थी। उसने सदैव अपने पति को कुमार्ग से बचाया था। पर इस समय वह भी चिन्ता में डूबी हुई थी। उसे स्वयं सन्देह हो रहा था कि वह जीवन भर की सच्चरित्रता बिलकुल व्यर्थ तो नही हो गई?..."(पूरा पढ़ें)

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साहित्य
कला और
संगीत

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आंकड़े
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