लेखक:प्रेमचंद

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प्रेमचंद

हिंदी उपन्यासकार, कहानीकार और चिंतक माने जाते हैं।

रचनाएं[सम्पादन]

कहानी[सम्पादन]

• नमक का दरोगा

• दो बैलो की कथा

• पूस की रात

• पंच परमेश्वर

• माता का हृदय

• नरक का मार्ग

• वफ़ा का खंजर

• पुत्र प्रेम

• घमंड का पुतला

• बंद दरवाजा

• कायापलट

• कर्मो का फल

• कफन

• बड़े घर की बेटी

• राष्ट्र का सेवक

• ईदगाह

• मंदिर और मस्जिद

• प्रेम सूत्र

• माँ

• वरदान

• काशी में आगमन

• बेटो वाली विधवा

• सभ्यता का रहस्य

उपन्यास[सम्पादन]

अन्य[सम्पादन]

अप्राप्य या विवादित रचनाएं[सम्पादन]

संचयन[सम्पादन]

रचनाएं प्रेमचंद संबंधित[सम्पादन]

जीवनवृत्तात्मक आलेख[सम्पादन]

प्रेमचंद (३१ जुलाई, १८८० - ८ अक्टूबर १९३६) हिन्दी और उर्दू के भारतीय लेखकों में से एक हैं। मूल नाम 'धनपत राय श्रीवास्तव' वाले प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया।

प्रेमचन्द की रचना-दृष्टि विभिन्न साहित्य रूपों में प्रवृत्त हुई। बहुमुखी प्रतिभा संपन्न प्रेमचंद ने उपन्यास, कहानी, नाटक, समीक्षा, लेख, सम्पादकीय, संस्मरण आदि अनेक विधाओं में साहित्य की सृष्टि की। प्रमुखतया उनकी ख्याति कथाकार के तौर पर हुई और अपने जीवन काल में ही वे ‘उपन्यास सम्राट’ की उपाधि से सम्मानित हुए। उन्होंने कुल १५ उपन्यास, ३०० से कुछ अधिक कहानियाँ, ३ नाटक, १० अनुवाद, ७ बाल-पुस्तकें तथा हजारों पृष्ठों के लेख, सम्पादकीय, भाषण, भूमिका, पत्र आदि की रचना की लेकिन जो यश और प्रतिष्ठा उन्हें उपन्यास और कहानियों से प्राप्त हुई, वह अन्य विधाओं से प्राप्त न हो सकी। यह स्थिति हिन्दी और उर्दू भाषा दोनों में समान रूप से दिखायी देती है।

साहित्यिक आलोचना[सम्पादन]